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जयपुर सीट पर राजनीतिक पार्टियों के नए समीकरण, गैर ब्राह्मण को बनाया उम्मीदवार

ज्योति खंडेलवाल वैश्य समाज से तो आती हैं लेकिन वह खुद को केवल वैश्य उम्मीदवार के दायरे में नहीं रखना चाहतीं. ज्योति खंडेलवाल का कहना है कि उन्हें तो समाज के सभी तबकों से वोट लेने हैं.

जयपुर सीट पर राजनीतिक पार्टियों के नए समीकरण, गैर ब्राह्मण को बनाया उम्मीदवार

जयपुर: लोकसभा चुनाव में जयपुर सीट पर 6 मई को वोटिंग होनी है लेकिन बीजेपी ने इस चुनाव के लिए अपना प्रत्याशी पहले घोषित करके लीड लेने की कोशिश की. रामचरण बोहरा पर पार्टी ने एक बार फिर भरोसा जताते हुए उन्हें टिकट दिया है. बोहरा का टिकट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि साल 1984 के बाद से अब तक हुए 9 चुनाव में जयपुर संसदीय सीट से कोई गैर ब्राह्मण प्रत्याशी चुनाव नहीं जीता है. इस लिस्ट में एक-एक कार्यकाल पंडित नवल किशोर शर्मा, महेश जोशी और रामचरण बोहरा के खाते में रहे हैं तो छह बार गिरधारीलाल भार्गव ने चुनाव जीता है. 

बीजेपी का प्रत्याशी पहले घोषित होने के बाद कांग्रेस को भी इस सीट पर टिकट के लिए मंथन की खातिर पर्याप्त वक्त मिल गया. बीजेपी से बोहरा की उम्मीदवारी के बाद कांग्रेस में दावेदारी जता रहे कई नेता कमजोर पड़ गए और पार्टी ने ज्योति खंडेलवाल को टिकट दिया. ज्योति खंडेलवाल की उम्मीदवारी को महिला प्रत्याशी के रूप में कम और वैश्य उम्मीदवार के रूप में ज्यादा देखा जा रहा है. हालांकि, वह खुद इससे इनकार करती हैं. 

ज्योति खंडेलवाल वैश्य समाज से तो आती हैं लेकिन वह खुद को केवल वैश्य उम्मीदवार के दायरे में नहीं रखना चाहतीं. ज्योति खंडेलवाल का कहना है कि उन्हें तो समाज के सभी तबकों से वोट लेने हैं. साथ ही वu यह भी कहती हैं कि अगर विपक्षी पार्टी इस चुनाव को जातिवादी रंग देने की कोशिश में है तो उसे महापौर का पहला प्रत्याक्ष चुनाव भी याद कर लेना चाहिए. इसी तरह कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद महेश जोशी भी इस चुनाव को जाति के दायरे में बांधने के पैरोकार नहीं हैं. 

इस पूरी चर्चा के बीच यह सवाल भी वाजिब है कि आखिर इस मुकाबले में जातिवाद की इतनी ज्यादा चर्चा क्यों है. इस सवाल का जवाब जयपुर शहर के वोटों के गणित में छिपा है. दरअसल, चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि जयपुर में तकरीबन 6 लाख ब्राह्मण, 4 लाख वैश्य, करीब पौने चार लाख मुस्लिम, पौने चार लाख के करीब ही अनुसूचित जाति के वोटर हैं. इसके साथ तकरीबन दो लाख ओबीसी, 1 लाख जाट, सवा लाख राजपूत और तकरीबन सवा लाख ही सिंधी-पंजाबी समाज के वोटर हैं. 

वोटों के इस गणित के कारण ही माना जा रहा कि रामचरण बोहरा को गैर ब्राह्मण प्रत्याशी ही टक्कर दे सकता है और इसमें भी वैश्य समाज का प्रत्याशी ज्यादा मजबूत हो सकता है. इन्हीं समीकरणों को देखते हुए कांग्रेस ने ज्योति खंडेलवाल को टिकट तो दिया लेकिन बीजेपी प्रत्याशी रामचरण बोहरा कहते हैं कि उनकी पार्टी जातिगत आधार पर न तो समाज को बांटती है और न ही वोटों को बंटने देगी.