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राजस्थान: कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं को दिया प्रशिक्षण, सीएम और डिप्टी सीएम भी रहे मौजूद

जयपुर शहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के ट्रेनिंग शिविर में पार्टी की एकजुटता पर फोकस किया गया. साथ ही शीर्ष नेतृत्व की ओर से एकजूट होकर चुनाव लड़ने का आह्वान किया गया. 

राजस्थान: कांग्रेस ने कार्यकर्ताओं को दिया प्रशिक्षण, सीएम और डिप्टी सीएम भी रहे मौजूद
कांग्रेस कार्यकर्ताओं के ट्रेनिंग शिविर में पार्टी की एकजुटता पर फोकस किया गया.

जयपुर/ भरत राज: लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस की ओर से आयोजित आमुखीकरण कार्यशाला में पार्टी में बूथ स्तर पर मजबूती से ज्यादा एकजुटता पर फोकस किया जा रहा है. बुधवार को ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी में दो दिवसीय कांग्रेस आमुखीकरण कार्यशाला का शुभारंभ हुआ. इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट, प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे भी मौजूद रहे.

बुधवार को जयपुर शहर, दौसा, झुंझुनू, सीकर, भरतपुर, अलवर, चूरु, चित्तौड़गढ़, करौली- धौलपुर, टोंक-सवाई माधोपुर, पाली, जोधपुर लोकसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया. प्रोजेक्ट शक्ति के मुख्य समन्वयक शशांक शुक्ला के नेतृत्व में आईसीसी एक्सपर्ट्स ने कार्यकर्ताओं को लोकसभा चुनाव मैनेजमेंट के गुर सिखाए. साथ ही बीजेपी की ओर से सोशल मीडिया पर चलाई जाने वाली अफवाहों से भी सावधान रहने की बात कही.

जयपुर शहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के ट्रेनिंग शिविर में पार्टी की एकजुटता पर फोकस किया गया. साथ ही शीर्ष नेतृत्व की ओर से एकजूट होकर चुनाव लड़ने का आह्वान किया गया. कार्यशाला में प्रशिक्षण के साथ ही नेताओं के ग्रुप फोटो भी खिंचवाए गए, ताकि जनता में एक मैसेज जा सके कि सभी कार्यकर्ता और नेता एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. 

वहीं जयपुर लोकसभा क्षेत्र के लिए पार्टी की एक रणनीति तैयार की गई. इस रणनीति के तहत जयपुर लोकसभा प्रत्याशी ज्योति खंडेलवाल के साथ शहर के विधायक और पार्टी प्रत्याशी रहे सभी नेताओं के फोटो खिंचवाई गए. इस फोटो के मार्फत यह संदेश देने की कोशिश की गई कि जयपुर शहर कांग्रेस एकजुट है. 

शहर की कुल 8 विधानसभा क्षेत्रों में तमाम कांग्रेस के कार्यकर्ता और नेता खंडेलवाल की जीत के लिए काम करेंगे. इसके लिए पार्टी के तमाम नेताओं को निर्देश भी दिए गए की हर एक विधानसभा क्षेत्र में वह ज्योति के पक्ष में ज्यादा से ज्यादा वोट दिलाने का प्रयास करें. अगर ऐसा नहीं होता है तो संबंधित विधायक या मंत्री या फिर पार्टी प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव के बाद कार्रवाई की जा सकती है.