चाईबासा का सारंडा जंगल : कभी नक्सलवाद की जद में था, आज वोटिंग के लिए है तैयार

सारंडा का मतलब होता है 700 पहाड़ियों का समूह. सड़कें अच्छी हैं. वादियां भी खूबसूरत हैं. कभी पूरा इलाका नक्सलवाद की जद में होता था, लेकिन आज शांति है. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं.

चाईबासा का सारंडा जंगल : कभी नक्सलवाद की जद में था, आज वोटिंग के लिए है तैयार
सारंडा इलाके में ही लगभग 4200 फीट की ऊंचाई पर किरीबुरू हिल स्टेशन है.

चाईबासा : झारखंड के चाईबासा से 90 किलोमीटर की दूरी पर 820 वर्ग फीट में फैला सारंडा का घना जंगल, जहां प्रकृति का अद्भुत नजारा है. लगभग सात सौ छोटे-बड़े पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच फैला सारंडा का इलाका कभी नक्सलवाद के लिए जाना जाता है. आज सारंडा से नक्सलवाद कोसों दूर है. सारंडा इलाके में ही लगभग 4200 फीट की ऊंचाई पर किरीबुरू हिल स्टेशन है. किरीबुरू प्रकृति की गोद में बसा हुआ है और यहां आयरन ओर यानी लौह अयस्क के खदान हैं. खान-खदान के बीच स्थित इस सुंदर पहाड़ी पर भी चुनावी चर्चा जोरों पर है. सारंडा के सुदूर इलाके में शांतिपूर्ण मतदान करवाना प्रशासन के लिए चुनौती है. 

चाईबासा जिला जो सिंहभूम लोकसभा के नाम से जाना जाता है, अपने खान, खनिज और प्रकृति की खूबसूरती के लिए जाना जाता है. चाईबासा से 70 किलोमीटर की दूरी पर ही सारंडा का घना जंगल शुरू हो जाता है.

सारंडा का मतलब होता है 700 पहाड़ियों का समूह. सड़कें अच्छी हैं. वादियां भी खूबसूरत हैं. कभी पूरा इलाका नक्सलवाद की जद में होता था, लेकिन आज शांति है. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं. चारों तरफ पहाड़, पर्वत और घना जंगल और इनसे होकर गुजरते रास्ते मन मोह लेगें. चुनाव इस इलाके में भी होना है. चुनावी चर्चा यहां भी है. बीएलओ मतदाता पर्ची देकर लोगों को वोटिंग के लिए यहां भी प्रेरित करते हैं.

हमने स्थानीय लोगों से बातें की. नक्सलवाद को लेकर क्या सोचते हैं? मतदान को लेकर इस इलाके में क्या चर्चा है? चुनाव के मुद्दे क्या हैं? कभी इस इलाके में लाल आतंक का दबदबा था, लेकिन सरकार के सुरक्षा घेरे ने अब यहां नक्सलवाद की कमर तोड़ दी है.

अब यहां नक्सलवाद की समस्या तो नहीं है, लेकिन सुरक्षाकर्मी हर पल चौकस रहते हैं. हाथी मोड़ से जो सड़क मुड़ती है सैडल तक होते हुए सारंडा के रास्ते किरीबुरू जाती है. रास्ते में आईईडी प्रभावित क्षेत्र की चेतावनी की बोर्ड भी दिखती है. सारंडा का इलाका अब ख़ौफ़नाक नहीं रहा. यहां रह रहे लोग अब खुद को सुरक्षित महसूस करते हैं. वे बेखौफ रहते हैं. लेकिन बुनियादी समस्या का अभाव बताते हैं. शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में और काम की जरूरत बताते हैं.

सारंडा में चुनावी विसाद को समझते समझते लगभग शाम हो गयी. यहां के सनसेट पॉइंट की जानकारी मिली. यह इलाका उड़ीसा से भी सटा है, इसलिए सनसेट पॉइंट से सूर्यास्त देखने बड़ी संख्या में झारखंड और ओडिशा के शैलानी पहुंचते हैं. सारंडा के इलाके में अब भी गरीबी है. स्थानीय लोगों को कई समस्याओं से जूझना पड़ता है.

पर्यटन की दृष्टि से भी ये स्थान काफी समृद्ध है. ऐसे में अगर आप खूबसूरत झरनों, पहाड़ों और घने जंगलों में घूमने के शौकीन हैं तो सारंडा के जंगल आपके लिए उपयुक्त जगह है. प्रकृति के अद्भूत नजारे से भरपूर सात सौ पहाड़ियों और घने जंगलों का यह घर विहंगम दृश्यों और रोमांच से भरा है. खामोशी में डूबे इस जंगल में हरियाली और खूबसूरती का बेजोड़ मेल देखने को मिलता है. 

सारंडा का कुछ हिस्सा ओडिशा और छत्तीसगढ़ की सीमा से भी सटा है. प्रकृति की गोद में बसा यह यह वन पूरे एशिया में साल (सखुआ) वृक्ष की अत्याधिक संख्या के लिए भी जाना जाता है. इसके अलावा यहां आम, जामुन, बांस, कटहल एवं पलाश के भी अनेकों पेड़ हैं. ऊंचे, छांवदार, फलदार इन अनगिनत पेड़ों का वर्चस्व यहां कुछ ऐसा है कि सूरज की किरणें भी आने से घबराती है.  अब इस इलाके के लोग भी अपनी मर्जी से मतदान करने की बात करते हैं.