अमेठी में इस बार कांटे की लड़ाई, स्‍मृत‍ि ईरानी के सामने राहुल गांधी कैसे बचाएंगे अपना किला

अमेठी में बीजेपी ने राहुल गांधी के सामने एक बार फिर से केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को अमेठी से अपना प्रत्याशी बनाया है. आमतौर पर अमेठी को गांधी परिवार की सबसे सुरक्षित सीट के तौर पर देखा जाता है. लेकिन इस बार अमेठी राहुल गांधी के लिए सुरक्षित नहीं है. शायद इस बात का अंदाज़ा खुद राहुल गांधी को भी है.

अमेठी में इस बार कांटे की लड़ाई, स्‍मृत‍ि ईरानी के सामने राहुल गांधी कैसे बचाएंगे अपना किला

अमेठी: पांचवें चरण का चुनाव प्रचार शनिवार शाम 5 बजे थम गया. 6 मई को अमेठी-रायबरेली समेत यूपी की 14 लोकसभा सीटों पर मतदान होगा. लेकिन इस वक़्त पूरे देश की निगाहें गांधी परिवार के गढ़ अमेठी और रायबरेली पर है. अमेठी से लगातार चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं. बीजेपी ने एक बार फिर से केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को अमेठी से अपना प्रत्याशी बनाया है. आमतौर पर अमेठी को गांधी परिवार की सबसे सुरक्षित सीट के तौर पर देखा जाता है. लेकिन इस बार अमेठी राहुल गांधी के लिए सुरक्षित नहीं है. शायद इस बात का अंदाज़ा खुद राहुल गांधी को भी है. अमेठी में स्मृति ईरानी 2014 में चुनाव हारने के बाद भी 5 साल पूरी तरह से सक्रिय रहीं. स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के लिए अमेठी के मैदान को बेहद काँटे भरा बना दिया है.

दरअसल राहुल गांधी और उनकी कोर टीम को इस बात का अहसास था कि अमेठी और रायबरेली गांधी परिवार का गढ़ है और यहां की हवा गांधी परिवार की मर्ज़ी से चलती है. इसीलिए राहुल गांधी पूरे देश भर में घूम रहे थे, लेकिन अमेठी को लेकर आश्वस्त थे. राहुल गांधी का उनके संसदीय क्षेत्र में ग़ैरमौजूदगी का बीजेपी ने जमकर फ़ायदा उठाया. अमेठी के कई ग्रामीण इलाक़ों में स्मृति ईरानी ने शौचालय, पीएम आवास योजना के तहत घर, सोलर साईट पहुँचाने का काम किया. यही नहीं स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी तैयारी कर ली थी. अमेठी का ब्राह्मण वोट बैंक गांधी परिवार की नींव माना जाता है, लेकिन इस बार ब्राह्मण मतदाताओं का मूड अलग ही नज़र आ रहा है, जो कि अमेठी में राहुल गांधी के अनुकूल नहीं हैं.

लोगों के मन में सवाल राहुल वायनाड क्‍यों गए
अमेठी में घूमने पर यहां के लोगों के मन की बात पता चलती है. पिछले 15 दिनों से Zee News ने अमेठी के कई गाँव का दौरा किया और लोगों ने पूछा कि क्या अमेठी ने राहुल गांधी को कम प्यार दिया था या फिर अमेठी पर विश्वास नहीं है जो वो वायनाड क्‍यों चले गए.? इसके अलावा अमेठी में मोदी मैजिक भी देखने को मिला. यहां पर स्मृति ईरानी के पक्ष को मोदी मैजिक और ज़्यादा मज़बूत करता है.

अब आपको राहुल गांधी के उस पक्ष को भी जानना ज़रूरी है जो कि उनका सबसे मज़बूत हथियार माना जा रहा है. वो है गांधी-नेहरू परिवार का सदस्य होना. अमेठी गांधी परिवार के प्रति प्यार और सम्मान है. यहां लोगों से बातचीत में एक ख़ास बात निकलकर आती है कि हमारे बाप दादा सभी कांग्रेस को वोट करते आए हैं तो हम क्यों ना राहुल के साथ जाएँगे?

स्थानीय लोगों ने हमें बताया कि आज अमेठी अगर देश दुनिया में जाना जाता है तो सिर्फ़ गांधी परिवार की वजह से ही है. यानि कांग्रेस का जो परंपरागत वोट बैंक है, वो आज भी राहुल गांधी के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है. इसके अलावा प्रियंका गांधी ने भी अमेठी में मोर्चा संभाला है. प्रियंका ने बूथ स्तर से लेकर मतदाता तक अपने गांधी परिवार के कामकाज को गिनाया है. यूँ कहें कि राहुल को अगर अमेठी में कोई बचा सकता है तो वो है गांधी परिवार के प्रति सहानुभूति वाली लहर.

अब बात करते हैं अमेठी में बीजेपी और कांग्रेस के चुनावी मैनेजमेंट की. कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही अमेठी के लिए ख़ास रणनीति तैयार की है. दोनों ही दलों का फ़ोकस ग्राम प्रधान और बीडीसी सदस्यों पर है. दोनों दल ग्राम प्रधानों से मुलाक़ात कर उन्हें अपने पाले में खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं.

बीजेपी ने अपने नेताओं की एक लंबी फ़ौज अमेठी में उतार दी थी. संजीव बालियान से लेकर यूपी सरकार के कई मंत्री दिन रात अमेठी में डेरा डाले हुए थे. वहीं कांग्रेस की तरफ़ से कमान ख़ुद प्रियंका ने संभाल रखी थी. प्रियंका दिन भर यूपी के अलग अलग हिस्सों में प्रचार करने के बाद शाम को अमेठी आ जाती थीं. कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी अमेठी में डेरा डाला था. चुनाव प्रचार के अंतिम दिन बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने स्मृति ईरानी के पक्ष में रोड शो किया तो प्रियंका गांधी ने अपने भाई राहुल गांधी के लिए कई सभाएँ कीं. कुल मिलाकर अगर अमेठी को देखा जाए तो यहाँ पर हार जीत का अंतर बेहद कम रहने वाला है और इस बात का अंदाज़ा लगाना बेहद मुश्किल है कि इस बार कौन जीतेगा अमेठी की जंग?

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