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बिहार : आरा के इस गांव में सड़क नहीं तो लोगों ने लिया NOTA पर वोट देने का फैसला

गांव से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्टेट हाइवे गुजरती है, लेकिन वहां पहुंचाना लोगों के लिए जोखिम भरा है

बिहार : आरा के इस गांव में सड़क नहीं तो लोगों ने लिया NOTA पर वोट देने का फैसला
आरा के इस गांव के लोंगों ने किया नेताओं का बहिष्कार.

मनीष कुमार सिंह/आरा : लोकसभा चुनाव की तैयारियों में सारी पार्टियां लगी हुई हैं. हर कोई मतदाताओं को अपने घोषणा पत्र के जरिये लोकलुभावन वादों से अपनी ओर खींचना चाहता है. मगर देश के अंदर एक तबका ऐसा भी है जो नेताओं और सरकार के काम से बिल्कुल असहमत है. पहले चरण के मतदान में बिहार में कई जगहों पर लोगों ने मतदान का बहिष्कार किया तो वहीं, भोजपुर जिला के गड़हनी प्रखंड के तीनघरवा टोला गांव के लोगों ने भी यह तय किया है कि वे लोकतंत्र के पर्व का जश्न तो मनाएंगे, लेकिन इसबार नोटा पर बटन दबाकर.

गांव वालों का कहना है कि जिन नेताओं पर उन्होंने भरोसा किया उन्होंने उनके साथ चुनाव जीतने के बाद महज छलावा किया. वो ऐसा इसलिए मानते हैं क्योंकि पूरा गांव सड़क और पुल के अभाव में आज भी पगडंडियों के सहारे बाजार जाता है.

गांव से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्टेट हाइवे गुजरती है, लेकिन वहां पहुंचाना लोगों के लिए जोखिम भरा है. त्रस्त लोगों ने तय किया है कि इस बार के चुनाव में किसी भी पार्टी के हक में मतदान नहीं करना है.

ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ बिगुल फूंक दी है. बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगाकर नेताओं को सचेत कर दिया है. ग्रामीणों के कहना है कि अगर गांव आए तो विरोध झेलना होगा. ग्रामीणों ने एक स्वर में 'रोड नहीं तो वोट नहीं' का नारा बुलंद कर दिया है.

ग्रामीणों के आपसी सहयोग से दो दशक पूर्व एक पुलिया का आधा-अधूरा निर्माण किया गया था. जुगाड़ टेक्नोलॉजी के तहत बिजली का खंभा रख ग्रामीण जान जोखिम में डालकर पुल पार करते हैं. बरसात के दिनों में 2-3 महीने तक रास्ता जानलेवा हो जाता है. इसी रास्ते के सहारे तीन घरवा टोला, सिहार, बरघारा, हदियाबाद सहित कई गांवों के लोग गड़हनी बाजार तक आते हैं.