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'दरबारी' से घिरे हैं राहुल गांधी! कौन है खास, कौन पहुंचा रहा कांग्रेस अध्यक्ष को नुकसान?

एक तरफ जहां प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में आए NDA खेमे में इस बात की अटकलें चल रही हैं कि किस नेता को मोदी कैबिनेट में जगह मिलेगी, किसका पत्ता कटेगा. दूसरी तरफ करारी हार झेलने वाले विपक्षी खेमे में हाहाकार मचा हुआ है. नेता आपस में एक-दूसरे के ऊपर हार की जिम्मेदारी डाल रहे हैं. सबसे ज्यादा हलचल मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस (Congress) में है.

'दरबारी' से घिरे हैं राहुल गांधी! कौन है खास, कौन पहुंचा रहा कांग्रेस अध्यक्ष को नुकसान?
राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की खबरें मीडिया में चल रही हैं, हालांकि इसपर मुहर लगी है या नहीं यह स्पष्ट नहीं हो पाया है. तस्वीर साभार: राहुल गांधी फेसबुक पेज

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद देश में दो राजनीतिक घटनाएं सुर्खियां बन रही हैं. एक तरफ जहां प्रचंड बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में आए NDA खेमे में इस बात की अटकलें चल रही हैं कि किस नेता को मोदी कैबिनेट में जगह मिलेगी, किसका पत्ता कटेगा. हालांकि गुरुवार शाम सात बजे शपथ ग्रहण समारोह शुरू होते ही इन अटकलों पर विराम लग जाएगा. दूसरी तरफ करारी हार झेलने वाले विपक्षी खेमे में हाहाकार मचा हुआ है. नेता आपस में एक-दूसरे के ऊपर हार की जिम्मेदारी डाल रहे हैं. सबसे ज्यादा हलचल मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस (Congress) में है.

चुनाव में हार पर मंथन के लिए बुलाई गई कांग्रेस (Congress) कार्य समिति (CWC) की बैठक में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul gandhi) ने इस्तीफे की पेशकश कर दी. उन्होंने कांग्रेस (Congress) शासित राज्यों में बीजेपी जीत पर अपने मुख्यमंत्रियों की क्लास लगाई है. हालांकि अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि राहुल गांधी (Rahul gandhi) का इस्तीफा मंजूर हो पाया है या नहीं. राहुल को अध्यक्ष पद पर बनाए रखने के लिए मान-मनौवल का दौर जारी है. कुल मिलाकर देखें तो देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul gandhi) अपने दरबारियों में ऐसे लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं कि कौन उन्हें गलत सलाह दे रहा है और कौन पार्टी का सच्चा सिपाही है.

ICICI के पूर्व अफसर कांग्रेस (Congress) के लिए तैयार कर रहे रणनीति
देश की राजधानी नई दिल्ली के 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस (Congress) मुख्यालय में मायूसी छाई हुई है. खासतौर से राहुल गांधी (Rahul gandhi) की विशिष्ट मंडली में उनके करीबी बने बैठे बाहरी लोगों का पार्टी के पदाधिकारी मौन विरोध कर रहे हैं.

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इस मंडली में शामिल लोगों में शीर्ष स्तर पर राहुल गांधी (Rahul gandhi) के करीबी सहयोगी अलंकार सवाई हैं. आईसीआईसीआई बैंक के पूर्व अधिकारी सवाई पार्टी अध्यक्ष के लिए दस्तावेजी और शोध कार्य के साथ-साथ विचार सुझाने और राजनीतिक रणनीति बनाने में मदद करते हैं.

कांग्रेस (Congress) के एक पदाधिकारी ने बताया, 'अलंकार का पार्टी में काफी दबदबा है. राहुल वरिष्ठ नेताओं की सलाह को नजरंदाज कर सकते हैं, लेकिन वह अलंकार की बातें अक्सर सुनते हैं. सभी कांग्रेस (Congress)ी मुख्यमंत्री और अहमद पटेल भी उनको अहमियत देते हैं.'

कुछ कांग्रेस (Congress)ी जनता और राहुल के बीच रुकावट हैं
राहुल गांधी (Rahul gandhi) से मिलने का समय पाने में विफल नेता अपने लिए सारे दरवाजे बंद पाते हैं और वे इसके लिए कौशल विद्यार्थी या के. राजू पर दोष मढ़ते हैं. आम धारणा है कि यह मंडली नेता और उनके प्रति निष्ठावान भक्तों के बीच दीवार का काम करती है.

ऑक्सफोर्ड से लौटे विद्यार्थी 2014 के चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद राहुल के निजी सचिव कनिष्क सिंह को दरकिनार करके उनके करीबी बने. इसके बाद पूर्व आईएएस अधिकारी के. राजू आए.

राहुल के कथित दरबारियों से है कांग्रेस (Congress) वर्करों को ऐतराज
राजस्थान के विधायक मंगलवार को पार्टी दफ्तर में काफी नाराज दिखे. उन्होंने कहा, "हमें राहुलजी से कोई शिकायत नहीं है. वह हमारे लिए हमेशा दयालु हैं लेकिन ये दरबारी हमें उनसे मिलने नहीं देते हैं." 24 अकबर रोड में बैठने वाले पार्टी के पुराने लोगों को 12 तुगलक लेन स्थित राहुल गांधी (Rahul gandhi) के आवास पर शायद ही तवज्जो दिया जाता है.

राहुल के इर्द-गिर्द वाम विचारों के लोगों को जमावड़ा
कांग्रेस (Congress) मुख्यालय में 35 साल से काम कर रहे अखिल भारतीय कांग्रेस (Congress) के मध्यम स्तर के एक पदाधिकारी ने बताया, "इस दफ्तर में किशोर उपाध्याय और वी. जॉर्ज मेरी तरह यहां (अकबर रोड) स्टेनोग्राफर थे. राजीव गांधी उनको लाए थे. उन्होंने बाहरी लोगों से बेहतर काम किया. वे कांग्रेस (Congress) की संस्कृति व भावना को काफी अच्छी तरह समझते थे." पार्टी कॉडर और दूसरे स्तर के कुछ नेताओं का मानना है कि राहुल के इर्द-गिर्द कई प्रमुख लोग हैं जो कम्युनिस्ट के विचारों से प्रेरित हैं.

संदीप सिंह तैयार करते हैं प्रियंका का भाषण
मसलन, संदीप सिंह को पार्टी में बाहरी माना जाता है. वह पहले ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) में थे जो कम्युनिस्ट से जुड़ा संगठन है. जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र नेता के रूप में संदीप ने 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को काला झंडा दिखाया था. वह इस समय राहुल गांधी (Rahul gandhi) के राजनीतिक सलाहकारों में शामिल हैं जो राहुल और प्रियंका के लिए भाषण तैयार करते हैं.

'कांग्रेस (Congress) की छवि खराब की जा रही है'
कांग्रेस (Congress) के एक पूर्व राष्ट्रीय सचिव ने कहा, "कांग्रेस (Congress) पार्टी की राष्ट्रीय छवि को प्रभावित करने वाली घटनाओं में एक घटना कन्हैया कुमार के समर्थन में राहुल का जेएनयू दौरा शामिल है. अगर कोई वामपंथी विचार वालों से घिरा हो तो ऐसी घटनाएं (जेएनयू की घटना) होनी ही है, जिससे पार्टी की निष्कलंक छवि को नुकसान पहुंचा. मार्क तुली (प्रख्यात पत्रकार) ने भी अपने एक आलेख में कहा कि कांग्रेस (Congress) को जाल में फंसकर अल्पसंख्यकों की पार्टी बनने के बजाए बहुमत की राय पर गौर करना चाहिए."

राहुल के दरबार में अन्य शख्सों में पूर्व नौकरशाह धीरज श्रीवास्तव, निवेशक व बैंकर प्रवीण चक्रवर्ती, मिशिगन बिजनेस स्कूल के ग्रेजुएट सचिन राव और पूर्व एसपीजी अधिकारी के. बी. बायजू शामिल हैं जिन्हें पुराने पदाधिकारी बाहरी मानते हैं.

संयुक्त प्रगतिशील गठबंन (यूपीए) की चेयरपर्सन सोनिया गांधी के सामने जब नेतृत्व के संकट का सवाल बना हुआ है, लिहाजा, बाहरियों के खिलाफ व्याप्त असंतोष के मद्देनजर लगता है पार्टी अध्यक्ष के दफ्तर में बदलाव हो सकता है. यह असंतोष खासतौर से उनके खिलाफ है जिनका झुकाव वामपंथ की तरफ है.

इनपुट: IANS