क्या ओंगोले में फिर अपनी जीत दोहरा पाएगी YSRCP? टीडीपी से टक्कर

लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण में 11 अप्रैल को ओंगोल में मतदान हुआ. आंध्र प्रदेश में विधानसभा के लिए मतदान हुआ है. ओंगोल सीट पर इस बार टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच मुकाबला है.

क्या ओंगोले में फिर अपनी जीत दोहरा पाएगी YSRCP? टीडीपी से टक्कर
YSRCP के सामने अपना प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है....

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के पहले चरण में 11 अप्रैल को ओंगोल में मतदान हुआ. आंध्र प्रदेश में विधानसभा के लिए मतदान हुआ है. ओंगोल सीट पर इस बार टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के बीच मुकाबला है. 2014 के चुनाव में वाईएसआर कांग्रेस ने वावी सुब्बा. रेड्डी को जीत मिली थी. दूसरे स्थान पर तेलुगु देशम पार्टी के मैगनटा श्रीनिवासुलु रेड्डी रहे थे. अब वही श्रीनिवासुलु रेड्डी पाला बदलकर इस बार वाईएसआर कांग्रेस की ओर से मैदान में हैं. 
टीडीपी ने राघव राव को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने डॉ. एसडीएम प्रसाद को जबकि बीजेपी ने थोगुन्ता श्रीनिवास को प्रत्याशी बनाया है. 
  
निर्दलीय उम्मीदवार ने जीता था पहला आम चुनाव
देश में पहला आम चुनाव 1952 में हुआ जिसमें निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की. 1957 से कांग्रेस ने इस सीट पर अपनी पकड़ बनाना शुरू की लेकिन उसकी कोशिशों को 1962 में उस समय तगड़ा झटका लगा जब आम चुनाव में सीपीआई ने इस पर जीत दर्ज की. 1967 के बाद कांग्रेस यहां से लगातार चार बार जीत दर्ज की. 

1984 में पहली बार टीडीपी ने खोला खाता
1980 के दशक में एनटी रामा राव ने कांग्रेस से अगल हो गए. उन्होंने तेलुगू देशम पार्टी की स्थापना की. 1984 के लोकसभा चुनाव में टीडीपी ने कांग्रेस को पूरे राज्य में तगड़ा झटका दिया. ओंगोल सीट पर भी टीडीपी ने अपना परचम फहराया. इसके बाद कांग्रेस और टीडीपी के बीच रेस शुरू हो गई. कभी टीडीपी तो कभी कांग्रेस के हाथ बाजी लगी. 1989 में हुए आम चुनावों में कांग्रेस ने वापसी की और फिर 1998 तक हुए चार चुनावों लगातार चार बार इस सीट से जीत हासिल की. 

 

1999 में टीडीपी ने एक बार फिर कांग्रेस को पटकनी दी. 2004 व 2009 में कांग्रेस दस साल तक इस सीट पर काबिज की. 2009-10 में राज्य में तेजी से समीकरण बदले. वाईएसआर कांग्रेस टीडीपी के लिए नई चुनौती बनकर उभरी. 2014 में वाईएसआर कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत की.