आर्सेलरमित्तल की 50000 करोड़ की ओडिशा प्रोजेक्ट रद्द

विश्व की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी आर्सेलरमित्तल ने अधिक विलंब, भूमि अधिग्रहण एवं लौह अयस्क भंडार हासिल करने में समस्याओं के चलते ओड़िशा में प्रस्तावित 12 अरब डॉलर (50,000 करोड़ रुपये) की इस्पात परियोजना से आज हाथ खींच लिया।

नई दिल्ली : विश्व की सबसे बड़ी इस्पात कंपनी आर्सेलरमित्तल ने अधिक विलंब, भूमि अधिग्रहण एवं लौह अयस्क भंडार हासिल करने में समस्याओं के चलते ओड़िशा में प्रस्तावित 12 अरब डॉलर (50,000 करोड़ रुपये) की इस्पात परियोजना से आज हाथ खींच लिया। इसके महज एक दिन पहले ही दक्षिण कोरियाई इस्पात कंपनी पोस्को भी कर्नाटक में प्रस्तावित अपनी 30,000 करोड़ रुपये की इस्पात मिल परियोजना से हट गई।
सरकार ने कल ही एक दर्जन क्षेत्रों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने के लिये एफडीआई सीमा बढ़ाई है और कई क्षेत्रों में स्वत: स्वीकृति मार्ग से एफडीआई को मंजूरी दी है। लक्ष्मी मित्तल की अगुवाई वाली आर्सेलरमित्तल का यह प्रस्तावित निवेश भारत में सबसे बड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्रस्तावों में से एक था। आर्सेलरमित्तल की भारत में दूसरी बड़ी परियोजना 50,000 करोड़ रुपये की झारखंड इस्पात परियोजना है।
वहीं पोस्को ने ओड़िशा में 52,000 करोड़ रुपये के निवेश से इस्पात संयंत्र लगाने का प्रस्ताव किया है। इन दोनों परियोजनाओं में भी काफी विलंब हो रहा है। कंपनी ने एक बयान में कहा, आर्सेलरमित्तल ने आज ओड़िशा के मुख्य सचिव से मुलाकात कर उन्हें सूचित किया कि कंपनी ने एकीकृत इस्पात संयंत्र के निर्माण पर आगे नहीं बढ़ने का निर्णय किया है। हालांकि, कंपनी झारखंड व कर्नाटक में अन्य दो परियोजनाओं पर काम जारी रखेगी। इन दोनों परियोजनाओं में प्रगति हो रही है।
उल्लेखनीय है कि आर्सेलरमित्तल ने 12 अरब डॉलर (50,000 करोड़ रुपये) के निवेश से क्योंझार में चार चरणों में 1.2 करोड़ टन का एक इस्पात संयंत्र लगाने के लिए 2006 में ओड़िशा सरकार के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इस समझौता का दिसंबर, 2011 से नवीकरण नहीं किया है।
आर्सेलरमित्तल के सीईओ (भारत व चीन) विजय भटनागर ने कहा, पिछले सात साल में हमने इस परियोजना में उल्लेखनीय संसाधनों का निवेश किया है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण व इस परियोजना के लिए निजी लौह अयस्क खानों के आबंटन में भारी विलंब के चलते परियोजना व्यवहारिक नहीं रह गई है। कंपनी ने कहा कि परियोजना की घोषणा के बाद से अब तक वह व्यवहार्य रपट, पर्यावरण प्रभाव आकलन एवं अन्य संबंधित तकनीकी रपट जैसी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर चुकी है। इसके अलावा, उसने जनता की समस्यायें सुनने के लिये आठ ग्राम सभाएं भी की और निगमित सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) परियोजनाओं पर काफी धन खर्च किया है।
हालांकि, दुर्भाग्य से परियोजना को काफी बाहरी विलंब का सामना करना पड़ा है। आर्सेलरमित्तल इस्पात संयंत्र के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण नहीं कर पाई है और न ही वह लौह अयस्क की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकी है जो परियोजना के लिए जरूरी है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, आर्सेलर मित्तल ने पिछले तीन साल से ओडिशा में कोई प्रगति नहीं की है। भूमि अधिग्रहण के लिये जरूरी 15 ग्राम सभाओं में से उसने केवल आठ ग्राम सभा ही की हैं। यह काम 2010 के पहली छमाही तक हो गया था। उसके बाद से स्थिति आज तक ज्यों की त्यों बनी हुई है। (एजेंसी)

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