तेल कंपनियां अगले माह घटा सकती हैं दाम

पेट्रोल के दाम में अब तक की सबसे उंची वृद्धि करने के एक दिन बाद तेल कंपनियों ने गुरुवार को संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट के रुझान को देखते हुये अगले महीने पेट्रोल के दाम 1.50 से 1.80 रुपये लीटर तक कम हो सकते हैं।

नई दिल्ली : पेट्रोल के दाम में अब तक की सबसे उंची वृद्धि करने के एक दिन बाद तेल कंपनियों ने गुरुवार को संकेत दिया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में गिरावट के रुझान को देखते हुये अगले महीने पेट्रोल के दाम 1.50 से 1.80 रुपये लीटर तक कम हो सकते हैं।
दाम बढ़ने के बाद चौतरफा राजनीतिक दबाव को देखते हुये सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से पेट्रोल के दाम में एक झटके में 7.54 रुपये लीटर की वृद्धि के पीछे उनकी मजबूरी का ब्यौरा देने को कहा है। पिछले सात महीनों में कंपनियों ने पहली बार दाम बढ़ाए हैं।
इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) के चेयरमैन आरएस बुटोला ने आज यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल मूल्य के मौजूदा रुझान को देखते हुये लगता है कि पेट्रोल के दाम नीचे आयेंगे। तेल कंपनियों हर महीने की पहली और 16 तारीख को अंतरराष्ट्रीय तेल मूल्य और विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार की दरों के हिसाब से पेट्रोलियम पदार्थों के दाम की समीक्षा करती हैं। इस दौरान गैसोलिन के दाम जिसके आधार पर पेट्रोल के दाम तय होते हैं अंतरराष्ट्रीय बाजार में 124 डालर से घटकर 117 डालर प्रति बैरल पर आ गये हैं।
हालांकि, इस दौरान डालर के समक्ष रुपये की विनिमय दर 53.17 से 56 रुपये प्रति डालर के स्तर तक गिर गई है। बुटोला के अनुसार, ‘‘अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल मूल्य में एक डालर की कमी से पेट्रोलियम उत्पाद का दाम 33 पैसे लीटर घटता है जबकि डालर के समक्ष रुपये की विनिमय दर एक रुपये घटने से दाम में 77 पैसे की वृद्धि की जरुरत होती है।
इस महीने के बाकी दिनों में यदि दाम में गिरावट का रुझान जारी रहता है तो तेल कंपनियां एक जून को होने वाली मूल्य समीक्षा में 1.25 से लेकर 1.50 रुपये लीटर तक दाम घटा सकती हैं। बिक्री कर और वैट सहित यह कमी और अधिक होगी। बुटोला ने कहा कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम नीचे आयेंगे। यदि दाम घटते हैं और रुपये की विनिमय दर में और गिरावट नहीं आती है तो हम इसका लाभ उपभोक्ता को पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि जैसा हमने 16 नवंबर और एक दिसंबर 2011 को किया उसी तरह हम फिर से मूल्य में कमी का लाभ उपभोक्ता को देंगे।
बुटोला के साथ इस मौके पर हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कारपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एस. रॉय चौधरी भी थे। उन्होंने कहा कि दाम घटाने के बारे में किसी ने हमें कोई निर्देश नहीं दिया है। बुटोला ने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, इस तरह की स्थिति नहीं है, किसी भी वर्ग अथवा संबद्ध पक्ष ने दाम घटाने को नहीं कहा है। उन्होंने बताया कि नवंबर के बाद जब से दाम नहीं बढ़े पिछले वित्त वर्ष में 31 मार्च तक तेल कंपनियों को केवल पेट्रोल की बिक्री पर ही 4,890 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, इसके बाद चालू वित्त वर्ष में पिछले 50 दिनों में करीब 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान पेट्रोल पर हो चुका है।
सरकार ने जून, 2010 में पेट्रोल के दाम नियंत्रणमुक्त कर दिये थे, लेकिन बावजूद इसके तेल कंपनियां हर समय खुले हाथ इसके दाम नहीं बढ़ा पातीं। फरवरी में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों को देखते हुये दिसंबर के बाद से कंपनियों ने पेट्रोल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया। इस दौरान एक समय पेट्रोल पर नुकसान 10 रुपये लीटर तक पहुंच गया था। सरकार के साथ व्यापक विचार विमर्श किया गया। पेट्रोल पर सब्सिडी देने को कहा गया लेकिन सरकार ने कहा कि यह उत्पाद नियंत्रणमुक्त कर दिया गया है। इस पर सब्सिडी नहीं दी जा सकती। इसके बाद तेल कंपनियों के समक्ष दाम बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा था। (एजेंसी)