सब्सिडी में कटौती, उर्वरक और होगा महंगा!

विश्व बाजार में घटते दाम के मद्देनजर सरकार डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और म्युरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) जैसे फास्फेटिक और पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों की सब्सिडी में 2,000 से 2,700 रुपये प्रतिटन तक कटौती कर सकती है।

नई दिल्ली : विश्व बाजार में घटते दाम के मद्देनजर सरकार डाय-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और म्युरिएट ऑफ पोटाश (एमओपी) जैसे फास्फेटिक और पोटाशिक (पी एंड के) उर्वरकों की सब्सिडी में 2,000 से 2,700 रुपये प्रतिटन तक कटौती कर सकती है।
घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले एक सरकारी अधिकारी ने कहा वित्त वर्ष 2013.14 में उर्वरक मंत्रालय द्वारा डीएपी सब्सिडी में 2,000 रुपये से लेकर 12,350 रुपये प्रति टन तथा एमओपी सब्सिडी में 2,700 से लेकर 11,700 रुपये प्रति टन तक सब्सिडी कटौती की उम्मीद है। एक अप्रैल 2010 को पेश पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (एनबीएस) व्यवस्था के तहत पी एंड के उर्वरकों के 22 किस्मों की खुदरा कीमत को नियंत्रणमुक्त कर दिया गया, लेकिन इन पोषक तत्वों को किसानों को लागत से कम कीमत पर बेचने के लिए सरकार कंपनियों को बिक्री मूल्य और लागत के बीच के अंतर की भरपाई करती है।
इस महीने समाप्त हो रहे चालू वित्तवर्ष में सरकार ने डीएपी पर सब्सिडी 14,350 रुपये प्रति टन और एमओपी पर 14,400 रुपये प्रति टन तय की थी। डीएपी और एमओपी पर सब्सिडी वित्तवर्ष 2011.12 में क्रमश: 19,763 रुपये और 16,054 रुपये प्रति टन थी।
अधिकारी ने कहा, इन फसल के पोषक तत्वों पर सब्सिडी में कटौती का फैसला डीएपी और एमओपी के घटते वैश्विक कीमतों के मद्देनजर किया गया। सब्सिडी का निर्धारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों के हिसाब से किया जाता है। इसलिए अगर वैश्विक कीमतें कम हो रही हों तो सब्सिडी को भी कम करना होता है।
मंत्रालय के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि नई सब्सिडी दरें वर्ष 2013.14 में लागू होंगी और इसके लिए मंत्रिमंडल की मंजूरी लेनी होगी जिसे 10 अप्रैल से पहले विचारार्थ लिया जाना है। चालू वित्तवर्ष की पहले दो तिमाहियों में डीएपी और एमओपी की वैश्विक कीमतों में वृद्धि और कमजोर रुपये के कारण सरकार का उर्वरक सब्सिडी खर्च बढ़ा है।
पिछले सप्ताह रसायन एवं उर्वरक राज्यमंत्री श्रीकांत जेना ने संसद को बताया कि वर्ष 2012.13 में उर्वरक सब्सिडी के लिए बजट अनुमान 65,874 करोड़ रुपये का था। यह अनुमान 1,02,207.38 करोड़ रुपये की अनुमानित जरुरत के समक्ष रखा गया था। अब इसके लिये संशोधित अनुमान में 70,628 करोड़ रुपये का आवंटन रखा गया है।
जेना ने कहा कि वास्तविक जरुरत और संशोधित अनुमान के तहत उपलब्ध कराये गये कोष के बीच धन की कमी रह सकती है और यह देनदारी अगले साल में पहुंच सकती है। देश में इस साल फरवरी तक 78.64 लाख टन यूरिया का आयात किया गया जबकि पिछले पूरे वित्त वर्ष में 78.34 लाख टन यूरिया आयात किया गया। वर्ष 2012.13 में अप्रैल से फरवरी की अवधि में डीएपी का आयात 57.79 लाख टन और एमओपी का 18.14 लाख टन रहा। भारत में हर साल औसतन तीन करोड़ टन यूरिया और करीब 2.5 से 2.6 करोड़ टन डीएपी और एमओपी तथा कम्पलैक्स उर्वरक की खपत होती है। (एजेंसी)