डाउ केमिकल्स प्रायोजन से नहीं हटेगा: IOC

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने डाउ केमिकल्स को लंदन ओलंपिक के प्रायोजन से हटाने की भारत सरकार की मांग आज खारिज कर दी।

 

नई दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने डाउ केमिकल्स को लंदन ओलंपिक के प्रायोजन से हटाने की भारत सरकार की मांग आज खारिज कर दी।

 

खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव राहुल भटनागर को लिखे पत्र में आईओसी ने कहा कि भोपाल गैसपीड़ितों के प्रति सरकार की हमदर्दी की वे सराहना करते हैं लेकिन डाउ केमिकल्स उस समय ना तो संयंत्र का मालिक था और ना ही उसे चला रहा था, जब भोपाल गैस त्रासदी हुई थी।

 

आईओसी के एनओसी मामलों के निदेशक पेरे मिरो ने भटनागर को लिखे पत्र में यह बात कही है। भटनागर ने आईओसी अध्यक्ष जाक रोगे को 24 फरवरी को लिखे पत्र में डाउ को ओलंपिक के प्रायोजक के तौर पर हटाने की मांग की थी।

 

पत्र में लिखा है, मैं 24 फरवरी 2012 के आपके पत्र के संदर्भ में यह पत्र लिख रहा हूं। आईओसी मानती है कि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी भयावह हादसा था। ओलंपिक आंदोलन पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है। इसमें कहा गया, आईओसी ने विभिन्न समूहों से मशविरा किया है लेकिन हम आपको आश्वासन दिलाना चाहते हैं कि हमने उन्हीं लोगों से साझेदारियां की हैं जो ओलंपिक आंदोलन के मूल्यों को समझते हैं।

 

पत्र में कहा है, डाउ विश्व स्तर की अग्रणी कंपनी है। हम आपके पत्र के लिये धन्यवाद देते हैं और आपकी चिंता समझते हैं। मिरो ने कहा कि आईओसी और लंदन ओलंपिक आयोजन समिति डाउ से करार करते समय भोपाल गैस त्रासदी से वाकिफ थी।

 

मिरो ने कहा, त्रासदी के 16 साल बाद तक और 47 करोड़ डॉलर का मुआवजा करार होने के 12 साल बाद तक डाउ का यूनियन कार्बाइड में कोई हिस्सा नहीं था। भारतीय उच्चतम न्यायालय ने 1991 और 2007 में दो बार उस करार को बरकरार रखा। डाउ फिलहाल यूनियन कार्बाइड का मालिक है जो 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के लिये दोषी थी।
आईओए डाउ को हटाने के लिये आईओसी को मनाने में नाकाम रहा था जिसके बाद केंद्र सरकार को दखल देखकर आईओसी को पत्र लिखना पड़ा था।  (एजेंसी)