दबाव के बावजूद इस्तीफा न देने पर अड़े श्रीनिवासन

बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को हटाने की मांग आज तेज हो गयी। बोर्ड के आला अधिकारियों और कुछ राज्य इकाईयों ने उनके इस्तीफे की मांग की, जिसमें शरद पवार भी उन पर हो रहे हमलों में शामिल हो गये हैं लेकिन विवादों में घिरे इस प्रमुख ने दबाव में झुकने का कोई संकेत नहीं दिया है।

नई दिल्ली : बीसीसीआई अध्यक्ष एन श्रीनिवासन को हटाने की मांग आज तेज हो गयी। बोर्ड के आला अधिकारियों और कुछ राज्य इकाईयों ने उनके इस्तीफे की मांग की, जिसमें शरद पवार भी उन पर हो रहे हमलों में शामिल हो गये हैं लेकिन विवादों में घिरे इस प्रमुख ने दबाव में झुकने का कोई संकेत नहीं दिया है।
श्रीनिवासन के दामाद और चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक गुरूनाथ मयप्पन के आईपीएल में सट्टेबाजी के आरोपों में हुई गिरफ्तारी के बाद उनके बीसीसीआई अध्यक्ष पद पर बने रहने की आलाचेना हो रही है। बोर्ड के दो शीर्ष अधिकारियों राजीव शुक्ला और अरूण जेटली ने इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति जता दी है।
श्रीनिवासन अपना बचाव करने में लगे हुए हैं। उन्होंने इस्तीफे की मांगों को खारिज कर दिया। सूत्रों ने कहा कि प्रयास यही थे कि बीसीसीआई सदस्य उन पर दबाव बनायें ताकि वह अपने पद से हट जायें।
उन्होंने कहा कि पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष जगमोहन डालमिया (माना जाता है कि उन्होंने कोलकाता में बैठक के दौरान श्रीनिवासन का समर्थन किया था) उनके खिलाफ बयान दे सकते हैं।
शुक्ला ने जेटली के साथ बैठक के बाद कहा, ‘‘जांच लंबित रहने तक उन्हें इस प्रक्रिया से खुद को अलग कर लेना चाहिए क्योंकि पहले भी चर्चा हुई थी कि उन्हें अलग हो जाना चाहिए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें अब फैसला करना होगा। मैंने और जेटली ने उन्हें सुझाव दिया है।’’ जारी
शुक्ला ने कहा, ‘‘बोर्ड की विश्वसनीयता हमारे लिए सर्वोच्च है। हम बोर्ड और भारतीय क्रिकेट के सर्वश्रेष्ठ हित में काम करेंगे।’’ दिलचस्प बात है कि शुक्ला ने श्रीनिवासन पर अपनी अपील में इस्तीफे शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। बाद में स्पाट फिक्सिंग प्रकरण और इंडियन प्रीमियर लीग से जुड़े अन्य विवादों से निराश शुक्ला ने कहा कि वह दोबारा इस पद को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं।
शुक्ला का बयान बीसीसीआई अधिकारी ज्योतिरादित्य सिंधिया की श्रीनिवासन के इस्तीफे की मांग के एक दिन बाद आया है। सिंधिया ने कहा कि अपने खुद और क्रिकेट के हित को देखते हुए उचित जांच की जानी चाहिए। हैदराबाद क्रिकेट संघ के जी विनोद और दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के चेतन चौहान दो राज्य इकाईयों के अधिकारियों ने भी श्रीनिवासन के इस्तीफे की मांग की।
पूर्व बीसीसीआई प्रमुख पवार, जिनके कार्यकाल में श्रीनिवासन सचिव थे, ने हालांकि श्रीनिवासन को हटाने की सीधी मांग नहीं की लेकिन दावा किया कि, ‘‘अगर मैं इस हालत में होता, तो इस तरह की बकवास चीज नहीं हुई होती। ’’ केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि वह आईपीएल को लेकर हुए विवादों से काफी निराश हैं, उन्होंने भी बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष शंशाक मनोहर के सुझाव का समर्थन किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि स्पाट फिक्सिंग के आरोपों की सचाई जानने के लिये सभी मैचों की जांच एजेंसी को सौंप देनी चाहिए।
सरकार, जिसका बीसीसीआई पर कोई नियंत्रण नहीं है, ने भी श्रीनिवासन के इस्तीफे की मांग की। खेल मंत्रालय ने बयान देते हुए नैतिकता के आधार पर श्रीनिवासन को इस्तीफे देने को कहा। खेल मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘‘बीसीसीआई मैच और स्पाट फिक्सिंग के आरोपों की जांच कर रहा है। जांच में हितों का टकराव है इसलिए बीसीसीआई अध्यक्ष को जांच का नतीजा सामने आने तक नैतिक कारणों से इस्तीफा देना चाहिए।’’ मंत्रालय ने कहा कि वे इस मामले पर नजर रखे हुए हैं और साथ ही खेलों के लिए मजबूत भ्रष्टाचार रोधी कानून लाने की प्रतिबद्धता भी दोहराई।
इस बीच कर्नाटक और मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश न्यायमूर्ति टी जयराम चौटा, मद्रास उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायधीश न्यायमूर्ति आर बालासुब्रहमण्यम और बीसीसीआई सचिव संजय जगदाले को जांच आयोग के सदस्य नियुक्त किया गया। दोनों न्यायधीशों ने वादा किया कि मयप्पन और चेन्नई सुपरकिंग्स के मालिक इंडिया सीमेंट्स के खिलाफ जांच स्वतंत्र होगी और वे किसी भी दबाव में नहीं होंगे।
इस प्रकरण का खुलासा होने के बाद से ही श्रीनिवासन ने अड़ियल रुख अपनाते हुए पद छोड़ने से इनकार कर दिया है और साथ ही जोर देकर कहा है कि उनका इस्तीफे की मांग सिर्फ उनके पीछे पड़ा मीडिया कर रहा है। आज की मांग से हालांकि संकेत जा रहे हैं कि बोर्ड के अहम सदस्यों ने अपना रुख कड़ा कर दिया है जिसमें कई सक्रिय राजनेता भी शामिल हैं और वे अन्य लोगों को भी इस तरह की मांग के लिए राजी कर सकते हैं।
शुक्ला ने कहा, ‘‘हम सुझाव देना चाहते हैं कि इस आयोग की सिफारिशें लागू करने के लिए बीसीसीआई बाध्य होगा। ऐसा नहीं होगा कि यह रिपोर्ट बीसीसीआई को भेजी जाए और वे इस पर विचार करे, यह बाध्यकारी होगी। इस पर राजी होना होगा।’’ शुक्ला ने कहा, ‘‘वह निर्वाचित अध्यक्ष हैं। हमारा यह नजरिया है कि यह अच्छा होगा कि वह प्रक्रिया से दूर रहें। जेटली का भी यही मानना है। हमने यह सुझाव दिया है और इस मुद्दे पर फैसला उन्हें करना है। उन्होंेने हमें कहा है कि उनकी कोई गलती नहंी है और उन्हें सजा क्यों दी जाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जांच समिति नियुक्त की गई है और हम चाहते थे कि इसमें बहुमत में लोग बाहर से हों। यही कारण है कि हमने दो न्यायाधीशों को इसमें शामिल किया। हमने सुझाव दिया है कि इसकी रिपोर्ट बीसीसीआई के पास नहीं जाए और इसके निष्कषरें की जैसे हैं वैसे ही सिफारिश की जाए। हम यही चाहते हैं।’’ इस बीच हैदराबाद क्रिकेट संघ के अध्यक्ष विनोद ने भी श्रीनिवासन के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा, ‘‘जब आप बहुमत पर ध्यान देते हैं तो यह स्पष्ट दिखता है कि उनके पद छोड़ने की जरूरत है। जहां तक उनके इस्तीफे का सवाल है, इस पर चर्चा होना लाजमी है। ’’ (एजेंसी)

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