कराकोरम में फैल रहे हैं ग्लेशियर

पर्यावरण के लिए अच्छी खबर, वैज्ञानिकों ने उपग्रह से लिए गए चित्रों से दावा किया है कि कराकोरम रेंज में ग्लेशियर फैल रहे हैं। जबकि दुनिया भर में ग्लोबल वार्मिंग के चलते अन्य इलाकों के ग्लेशियर पिघल रहे हैं जिसको लेकर पर्यावरण सम्मेलनों में विश्व के देशों ने चिंता जाहिर करते हुए ग्लेशियर को बचाने के लिए फैसला ले चुके हैं। लेकिन कराकोरम क्षेत्र इसका अपवाद है, हालांकि इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं है।

लंदन: पर्यावरण के लिए अच्छी खबर, वैज्ञानिकों ने उपग्रह से लिए गए चित्रों से दावा किया है कि कराकोरम रेंज में ग्लेशियर फैल रहे हैं। जबकि दुनिया भर में ग्लोबल वार्मिंग के चलते अन्य इलाकों के ग्लेशियर पिघल रहे हैं जिसको लेकर पर्यावरण सम्मेलनों में विश्व के देशों ने चिंता जाहिर करते हुए ग्लेशियर को बचाने के लिए फैसला ले चुके हैं। लेकिन कराकोरम क्षेत्र इसका अपवाद है, हालांकि इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं है।

कराकोरम का यह इलाका चीन, पाकिस्तान व भारत में फैला हुआ है। इसी इलाके में दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी के-2 भी है। इन ग्लेश्यिारों में दुनिया की तीन फीसदी बर्फ फैली हुई है। हालांकि अभी तक कराकोरम की स्थिति अस्पष्ट ही रही है। इस क्षेत्र के काफी ऊंचाई एवं सीमावर्ती क्षेत्रों में फैले होने के कारण वैज्ञानिकों के लिए यहां के ग्लेश्यिरों का अध्ययन कर पाना असंभव सा रहा है। बर्फीले तूफानों के कारण यहां पहुंच पाना भी आसान नहीं है।

फ्रांस के वैज्ञानिक थ्रीडी उपग्रह तस्वीरों के जरिए वर्ष 2000 एवं वर्ष 2008 के नक्शों की तुलना करते हुए इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि इस दौरान ग्लेशियर की बर्फ में कोई कमी नहीं आई है, बल्कि वहां 0.11 मिलीमीटर प्रति वर्ष की दर से बर्फ बढ़ी है। बीबीसी ने दक्षिण पूर्वी फ्रांस के ग्रेनोबिल यूनिवर्सिटी की जूली गारगेले के हवाले से कहा कि कराकोरम में हालात भिन्न हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि फिलहाल यहां के ग्लेशियर स्थाई है। साथ ही उन्होंने आगाह किया कि इसका यह अर्थ नहीं निकालना चाहिए कि पूरे विश्व में बढ़ते तापमान की समस्या कम हो रही है। यह अध्ययन चीन की यारकांत नदी एवं पाकिस्तान की सिंधु नदी के बीच 5615 वर्ग किलोमीटर में कराकोरम इलाके की उपग्रह जांच पर आधारित है। यह इलाका सियाचिन ग्लेशियर के बाहर पड़ता है।

इस्लामाबाद के सस्टेनेबिल डेवलेपमेंट पॉलिसी इंस्टीट्यूट के अनुसार पिछले 35 वर्षो में सियाचिन ग्लेशियर दस किलोमीटर तक सिकुड़ चुका है। इसी अध्ययन से जुड़े ओनटोरियो यूनिवर्सिटी के ग्राहम कोगली ने लिखा है कि यह साफ नहीं हो पाया है कि कराकोरम में अभी तक ग्लोबल वार्मिग का असर क्यों नहीं पड़ा है।