नेत्रहीनों की मदद करेगा स्टेम सेल्स

वैज्ञानिकों का दावा है कि भ्रूणीय स्टेम कोशिकाओं का इस्तेमाल कर किए गए प्रायोगिक इलाज के बाद, दो नेत्रहीन महिलाएं अब थोड़ा बहुत देख सकती हैं।

लॉस एंजिलिस : वैज्ञानिकों का दावा है कि भ्रूणीय स्टेम कोशिकाओं का इस्तेमाल कर किए गए प्रायोगिक इलाज के बाद, दो नेत्रहीन महिलाएं अब थोड़ा बहुत देख सकती हैं। एक ओर जहां भ्रूणीय स्टेम कोशिकाएं सबसे पहले करीब एक दशक पूर्व अलग की गई थीं वहीं ज्यादातर अनुसंधान प्रयोगशाला में पशुओं पर किया गया।

 

नए परिणाम मनुष्यों में दृष्टि संबंधी समस्या के लिए पहले परीक्षणों से मिले हैं। अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि यह काम अब तक शुरूआती अवस्था में ही है। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में स्टेम कोशिकाओं के विशेषज्ञ पॉल नोफलर ने बताया कि इस शोध से काफी प्रोत्साहन मिल सकता है पर इस तरह के उपचार की योजना के बारे में अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

 

इस शोध के परिणामों को जर्नल ‘लैंसेट’ के ऑनलाइन संस्करण में कल प्रकाशित किया गया। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में, पिछले साल गर्मियों में, दोनों नेत्रहीन महिलाओं की एक एक आंख में भ्रूणीय स्टेम कोशिकाओं से तैयार की गई कोशिकाएं इंजेक्शन के जरिये प्रविष्ट कराई गईं।

 

एक मरीज में नेत्रहीनता का कारण आम था यानी उम्र संबंधी मैक्युलर क्षरण। दूसरी मरीज स्टारगैर्ड बीमारी से प्रभावित थी जिसमें आंखों की रोशनी चली जाती है। दोनों की ही बीमारियोंका कोई इलाज नहीं है। भ्रूणीय स्टेम कोशिका से इलाज के चार माह बाद दोनों की रोशनी में  सुधार के संकेत मिले। स्टारगैर्ड बीमारी की मरीज जहां कोई भी अक्षर नहीं पढ़ पाती थी, वह इलाज के बाद कम से कम पांच बड़े अक्षर पढ़ने में सक्षम हो गई।

 

बहरहाल, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मैक्युलर क्षरण प्रभावित मरीज की आंख की रोशनी में सुधार का कारण मनोवैज्ञानिक हो सकता है क्योंकि उसकी जिस आंख का इलाज नहीं किया गया था, उसकी रोशनी में भी सुधार प्रतीत हुआ।

 

दूसरी ओर, अध्ययन से अलग कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि दृष्टि में सुधार के दावे के बावजूद दोनों महिलाएं कानूनी तौर पर नेत्रहीन ही हैं। (एजेंसी)

 

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