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अंतिम दौर में पहुंची दोहा वार्ता, नतीजा सिफर

कतर की राजधानी दोहा में क्योतो प्रोटोकाल के भविष्य और उसके आगे की व्यवस्था पर फैसला करने के लिए चल जलवायु वार्ता का आज आखिरी दिन है, लेकिन किसी उपयुक्त करार का कोई संकेत नहीं है।

दोहा : कतर की राजधानी दोहा में क्योतो प्रोटोकाल के भविष्य और उसके आगे की व्यवस्था पर फैसला करने के लिए चल जलवायु वार्ता का आज आखिरी दिन है, लेकिन किसी उपयुक्त करार का कोई संकेत नहीं है। वार्ताकार रात तक मसौदा तैयार करने में लगे रहे ताकि सभी पक्षों को स्वीकार्य समझौते तक पहुंचा जा सके। विरोध कर रहे पक्षों ने अंतिम प्रारूप की भाषा को लेकर एतराज जताया। उनकी चिंता इस बात को लेकर भी है कि उनसे जुड़े सरोकारों को मसौदे में शामिल किया जाएगा या नहीं।
अमेरिका के नेतृत्व में अमीर देशों ने ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने और तेज से जाहिर हो रहीं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निबटने में मदद के गरीब देशों के प्रयासों के वित्तपोषण के लिए मात्रात्मक वित्तीय प्रतिबद्धता की मांग करने की कोशिशों को नाकाम करना चाहा। जलवायु वित्त पोषण का मुद्दा यहां सबसे जटिल रहा है क्योंकि गरीब देशों की शिकायत है कि जलवायु परिवर्तन पर पिछली कुछ वार्ताओं में धन को लेकर किए वादों को अमलीजामा नहीं पहनाया गया।
जलवायु वार्ता में असहमति का एक और मुद्दा विकसित देशों की ओर से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती को लेकर कोई नया लक्ष्य तय नहीं करने से संबंधित है। वे 2020 के बाद को लेकर समझौते के लिए वार्ता कर रहे हैं जिसमें भारत, चीन को प्रतिबद्धताओं के तहत लाने की कोशिश है। जहां कार्बन उर्त्सजन कटौती से जुड़ी प्रतिबद्धताओं के मुद्दे पर विकसित और विकासशील देशों के बीच दीवार पाटने पर अमेरिका और अन्य धनी देशों का मुख्य जोर रहा, सर्वाधिक गरीब देश क्योतो के बाद वाली किसी संधि में प्रवेश करने से पहले ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन गैसों में कटौती की अपनी अपेक्षित भूमिका निभाने और जलवायु वित्तपोषण प्रदान करने की दिशा में धनी देशों को ले जाने के लिए जिद्दोजेहद कर रहे हैं।
जलवायु कार्यकर्ता कोई प्रगति नहीं होता देख परेशान दिखे और उन्होंने अमेरिका पर वार्ता में प्रगति को बाधित करने का आरोप लगाया। भारत की वार्ताकार मीरा महर्षि ने कहा कि भारत का कार्बन उर्त्सजन बहुत कम है और वह अब भी उर्त्सजन को कम करने की कोशिश कर रहा है तथा ऐसे में विकसित देशों को भी अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘भारत एक बड़ा देश है, लेकिन यहां कार्बन की मात्रा कम है। हमारा प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष कार्बन उत्सर्जन 1.7 टन है। 2030 तक प्रति व्यक्ति उत्सर्जन 3.7 टन प्रति वर्ष को पार नहीं करेगा।’ (एजेंसी)