ऑस्ट्रेलिया से मिलेगा भारत को यूरेनियम

ऑस्ट्रेलिया की सत्तारुढ़ लेबर पार्टी ने रविवार को भारत को यूरेनियम बेचने पर लगी रोक को हटाने के पक्ष में मतदान किया।

मेलबर्न: ऑस्ट्रेलिया की सत्तारुढ़ लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम बेचने पर लंबे समय से लगा प्रतिबंध हटाने के प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड के साहसिक कदम का समर्थन किया जिससे दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के रास्ते की एक बड़ी रूकावट दूर हो जाएगी।

 

 

लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम बेचने पर लगी रोक को हटाने के पक्ष में रविवार को मतदान किया, जिससे परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों को भी यूरेनियम निर्यात करने का रास्ता साफ हो गया। भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है।

 

सिडनी में लेबर पार्टी के 46वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान 206 प्रतिनिधियों ने भारत को यूरेनियम निर्यात किए जाने के पक्ष में मतदान किया, जबकि 185 प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया।

 

भारत को यूरेनियम की बिक्री का विरोध करने वालों ने जापान में मार्च में शक्तिशाली भूकंप और सुनामी के कारण उत्पन्न फुकुशिमा परमाणु आपदा का हवाला दिया। वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री गिलार्ड ने कहा कि इस कदम से व्यापार को बढ़ावा देने और भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया के संबंधों को मजबूत बनाने में मदद् मिलेगी।

 

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हमे यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि इस क्षेत्र में हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत समेत सभी के साथ मजबूत से मजबूत संबंध बनाएं।’’ उन्होंने कहा कि यह तर्कसंगत नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया चीन को तो यूरेनियम बेचे लेकिन भारत को नहीं ।

 

गिलार्ड ने कहा ‘हम वह राजनीतिक दल नहीं है जो कड़े फैसले लेने में हिचकिचाएं। इस सम्मेलन में राष्ट्रीय हित के मद्देनजर हमें यह फैसला करना चाहिए।’

 

उन्होंने दलील दी कि ऑस्ट्रेलिया भारत को परमाणु अप्रसार संधि की बाध्यताओं का उल्लंघन किए बिना यूरेनियम बेच सकता है। उन्होंने कहा कि भारत को यूरेनियम बेचने संबंधी किसी भी समझौते में न्यूनतम प्रसार के खतरे से बचाव के कड़े उपाय होंगे।

 

गिलार्ड ने कहा ‘हमें यह सच स्वीकार करना होगा कि अगर हम भारत को यूरेनियम बेचने से इंकार कर देते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि भारत अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे न बढ़ाने का फैसला कर लेगा।’’ भारत को यूरेनियम के निर्यात की नीति में आए इस बदलाव से पहले काफी गर्मा-गरम बहस हुई। इस फैसले में संसाधन मंत्री मार्टिन फर्ग्यूशन, रक्षा मंत्री स्टिफन स्मिथ और दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जे.वेदरिल ने प्रधानमंत्री गिलार्ड का समर्थन किया।
है। (एजेंसी)

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