नेल्सन मंडेला को घर लाया गया, स्थिति गंभीर

नस्लभेद विरोधी आंदोलन के नायक और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति मंडेला को आज अस्पताल से छुट्टी दे दी गई तथा अब घर पर ही उन्हें गहन चिकित्सा उपचार मिलता रहेगा। उनकी स्थिति अभी गंभीर और अस्थिर बनी हुई है।

जोहानिसबर्ग : नस्लभेद विरोधी आंदोलन के नायक और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति मंडेला को आज अस्पताल से छुट्टी दे दी गई तथा अब घर पर ही उन्हें गहन चिकित्सा उपचार मिलता रहेगा। उनकी स्थिति अभी गंभीर और अस्थिर बनी हुई है। राष्ट्रपति जैकब जुमा ने एक बयान में कहा, पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला को आज सुबह (1 सितंबर, 2013) प्रीटोरिया के अस्पताल से छुट्टी दे दी गई जहां उनका उपचार चल रहा था। हम कामना करते हैं कि जोहानिसबर्ग स्थित उनके आवास पर सेहत में सुधार जारी रहेगा। इस ऐलान से एक दिन पहले अधिकारियों ने उन खबरों को खारिज कर दिया था जिनमें कहा गया था कि 95 वर्षीय मंडेला को पहले ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
जुमा ने कहा, मदीबा की स्थिति गंभीर और अस्थिर बनी हुई है। चिकित्सकों के दल का कहना था कि घर पर भी उन्हें इसी तरह की गहन चिकित्सा दी जा सकेगी। बीते 8 जून को मंडेला को फेफड़े में संक्रमण के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद से ही वह अस्पताल में थे। बयान में कहा गया है, उनके आवास में ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं जहां वह गहन उपचार हासिल कर सकेंगे। उनके आवास पर वही स्वास्थ्यकर्मी मौजूद हैं जो अस्पताल में उनकी देखभाल कर रहे थे। अगर जरूरत पड़ी तो उन्हें फिर से अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
राष्ट्रपति जुमा की ओर से जारी बयान में कहा गया है, अस्पताल में रहने के दौरान हमारे पूर्व राष्ट्रपति की हालत गंभीर और अस्थिर बनी रही। उन्हें हर तरह की चिकित्सा सुविधा दी गई और आगे भी दी जाती रहेगी। बयान में कहा गया, हम सभी लोगों का आह्वान करते हैं कि वे पूर्व राष्ट्रपति और उनके परिवार की निजता बरकरार रहने दें ताकि उनकी निरंतर देखभाल हो सके। पिछले साल दिसंबर के बाद से मंडेला को सांस संबंधी परेशानियों की वजह से चार बार अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
वह दिसंबर में फेफड़े में संक्रमण में उपचार और पित्ताशय में पथरी के ऑपरेशन के लिए 18 दिनों तक अस्पताल में रहे थे। मंडेला को इस साल मार्च में स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इस बार पर 10 दिनों के लिए अस्पताल में थे। वह 1994 से 1999 तक दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति रहे। 1993 में उन्हें नोबेल का शांति पुरस्कार दिया गया था। साल 2004 में उन्होंने सार्वजनिक जीवन से संन्यास ले लिया था। (एजेंसी)