‘यौन अपराधों के दोषी ने गोद ली भारतीय बच्ची’

छोटे बच्चों के साथ यौन अपराधों के दोषी एक इजरायली व्यक्ति ने भारत में सेरोगेट मां के साथ समझौते के तहत चार वर्ष की एक भारतीय बच्ची गोद ली है।

येरूशलम : छोटे बच्चों के साथ यौन अपराधों के दोषी एक इजरायली व्यक्ति ने भारत में सेरोगेट मां के साथ समझौते के तहत चार वर्ष की एक भारतीय बच्ची गोद ली है।
‘जुइश क्रॉनिकल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस आदमी ने सेरोगेट मां के साथ समझौते के तहत बच्ची को कानूनी तरीके से गोद लिया है। वर्तमान कानून के अनुसार इजरायली अधिकारी उससे इस लड़की को अलग नहीं कर सकते।
रिपोर्ट में कहा गया कि इजरायल में बच्चों के अधिकारों के लिए काम करने वाले गैर सरकारी संगठन नेशनल काउंसिल फॉर चाइल्ड (एनसीसी) ने एक स्वतंत्र जांच की। इस जांच के अनुसार, यह आदमी छोटे बच्चों के साथ यौन अपराध करने पर डेढ़ साल जेल में रह चुका है। ये अपराध उसने तब किए जब बच्चे उसकी देखरेख में थे। इनमें से कई बच्चों के साथ उत्पीड़न दोहराया गया।
अधिकारियों ने इस आदमी को बच्चों की और यौन रूप से आकर्षित होने वाला बताया।
एनसीसी को जब इस आदमी के बीते समय की जानकारी एक अज्ञात ईमेल के जरिए मिली तो उसने पुलिस, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और लड़की के स्कूल वालों को सूचित कर दिया। ये लोग बच्ची के इस पिता के पूर्वापराधों से बेखबर थे।
देखभाल प्राधिकरणों ने व्यक्ति को कथित रूप से निरीक्षण में रखा है और उसे मनोवैज्ञानिक उपचार कराने के आदेश दिए हैं। इजरायल में समलैंगिक जोड़ों को सेरोगेसी के प्रयोग की इजाजत नहीं है इसलिए यहां विदेशी सेरोगेसी के इस्तेमाल में काफी उछाल आया है। अपने देश में लंबी प्रक्रियाओं से बचने के लिए माता-पिता बनने की इच्छा रखने वाले लोग विदेश जाकर इसके लिए ज्यादा पैसा भरने को तैयार हैं।
एनसीसी के कार्यकारी निदेशक यित्झाक कादमान ने कहा, ‘पिछले छह वर्षों में विदेशी सेरोगेसी के जरिए 200 बच्चे इजरायल में आए हैं।’ कादमान ने कहा, ‘यह मामला हमें यह ध्यान दिलाने के लिए है कि कुछ बदलाव किए जाने चाहिए।’
रिपोर्ट में कहा गया कि इजरायल में सेरोगेसी की मदद लेने वाले या बच्चा गोद लेने वाले माता-पिता को गहन पूछताछ और पृष्ठभूमि की जांच से गुजरना पड़ता है जबकि विदेशों से सेरोगेसी करवाने वालों के लिए छानबीन काफी सरल है।
बच्चों के अधिकारों पर बनी नेसेट (इजरायली संसद) की समिति के प्रमुख ओर्ली लेवी-अबेकासिस के अनुसार, हर साल यौन अपराधों की सूचना देने वाले हजारों बच्चों में से सिर्फ 15 प्रतिशत बच्चों को ही इजरायली सामाजिक सेवाएं चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक उपचार उपलब्ध करवा पाती हैं।
कादमान द्वारा स्वास्थ्य मंत्री याएल जर्मन को लिखे गए पत्र के जवाब में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, ‘वह विदेशी सरोगेसी से पैदा हुए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई नीतियों पर विचार कर रहा है।’ (एजेंसी)