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अगर वाजपेयी कहें तो लौटा दूंगा भारत रत्‍न: अमर्त्‍य सेन

नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखने के विचार व्यक्त करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने भारत रत्न की उपाधि वापस करने की पेशकश कर दी है। अमर्त्य सेन ने कहा है कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहें तो मैं भारत रत्न लौटाने के लिए तैयार हूं। अमर्त्य सेन के इस बयान से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो
नई दिल्‍ली : नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखने के विचार व्यक्त करने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने भारत रत्न की उपाधि वापस करने की पेशकश कर दी है। अमर्त्य सेन ने कहा है कि यदि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहें तो मैं भारत रत्न लौटाने के लिए तैयार हूं। अमर्त्य सेन के इस बयान से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।
गौर हो कि अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अपने योगदान के लिए 1998 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किए गए सेन को 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने भारत रत्न से सम्मानित किया था।
अमर्त्‍य सेन बीजेपी सांसद चंदन मित्रा के उस बयान से आहत हैं, जिसमें उनसे भारत रत्न वापस लेने की मांग की गई थी। सेन ने कुछ दिन पहले गुजरात के विकास पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उनकी नजर में मोदी प्रधानमंत्री पद के लायक नहीं हैं। पिछले दिनों सेन ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि पीएम पद के लिए मोदी उन्हें मंजूर नहीं हैं।
उसके बाद से अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन से ये सम्मान छीनने की धमकी दी जाने लगी। बीजेपी से राज्यसभा सांसद चंदन मित्रा ने 23 जुलाई को ट्वीट किया, `अमर्त्य सेन कहते हैं कि वे नहीं चाहते कि मोदी भारत के पीएम बनें। क्या सेन भारत के मतदाता हैं? अगली एनडीए सरकार को उनसे भारत रत्न वापस ले लेना चाहिए।`
उधर, सेन से भारत रत्न वापस लेने की भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद चंदन मित्रा की टिप्पणी से भाजपा ने गुरुवार को अपने को अलग करते हुए कहा कि यह उनकी व्यक्गित सोच है मुख्य विपक्षी दल की नहीं। भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य मुरली मनोहर जोशी ने मित्रा की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर कहा कि ये मित्रा के व्यक्गित विचार हैं। मित्रा की टिप्पणी पर सेन की इस प्रतिक्रिया को भी जोशी ने उनके ‘व्यक्तिगत विचार’ बताया, जिसमें इस विश्व विख्यात अर्थशास्त्री ने कहा है कि अगर अटल बिहारी वाजपेयी कहें तो मैं भारत रत्न वापस कर दूंगा।
राजग सरकार के दौरान 1999 में भारत रत्न और उससे पहले 1998 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अमर्त्य सेन ने एक इंटरव्यू में कहा है कि एक भारतीय होने के नाते वह मोदी को देश के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं देखना चाहेंगे। मोदी पर उनका आरोप है कि उन्होंने अल्पसंख्यकों को सुरक्षित महसूस कराने में पूरी कोशिश नहीं की। इस अर्थशास्त्री ने मोदी के विकास मॉडल से भी असहमति जताते हुए उसकी आलोचना की है। इस पर मित्रा ने ट्वीट पर कहा है कि अमर्त्य सेन राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं और 2014 के चुनाव में भाजपा के नेतृत्व में राजग सरकार बनने पर उनसे भारत रत्न वापस ले लेना चाहिए। मित्रा ने यह भी आरोप लगाया कि सेन कांग्रेस की सोच को आगे बढ़ा रहे हैं।