'अन्ना की गिरफ्तारी का फैसला सहीं'

केंद्र सरकार ने गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को हिरासत में लिए जाने को हालातों और कानून के अनुसार उठाया गया कदम बताया है.

[caption id="attachment_3181" align="alignnone" width="300" caption="पी चिदंबरम"][/caption]

केंद्र सरकार ने गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे को हिरासत में लिए जाने को हालातों और कानून के अनुसार उठाया गया कदम बताया है.

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदम्बरम ने मंगलवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 'इंडिया अंगेस्ट करप्शन' और पुलिस के बीच लम्बी बातचीत के बाद अन्ना हजारे को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जे. पी. पार्क का नाम सुझाया गया था. लेकिन पुलिस ने प्रदर्शन से पहले अन्ना हजारे पक्ष को कुछ शर्ते मानने को कहा. पुलिस ने ये शर्ते सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्ववर्ती फैसलों और दिल्ली की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए तय की थी. लेकिन अन्ना हजारे के पक्ष ने इनमें से कुछ शर्तो पर सहमति नहीं दी, जिसके बाद जेपी पार्क. में धारा 144 लगा दी गई.

मंगलवार सुबह पुलिस अन्ना हजारे के आवास पर पहुंची और उनसे उनकी आगामी योजना के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि पुलिस के आदेश का उल्लंघन करते हुए वह जे. पी. पार्क जाएंगे. इसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया.

चिदम्बरम ने कहा कि यूपीए सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार के खिलाफ नहीं है. लेकिन दुनिया के किसी भी देश में बिना शर्तो के प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक चुनौती है और इसी आधार पर पुलिस ने उक्त फैसला लिया.

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने चिदम्बरम का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोक नहीं रही. लेकिन यह उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी भी है कि ऐसे प्रदर्शनों का समाज पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े, आम लोगों को किसी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े और शांति व्यवस्था भंग न हो.