पतंजलि योगपीठ में बाबा रामदेव के मंच से 'नमो मंत्र' आज

योग गुरु बाबा रामदेव और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक मंच पर दिखेंगे। नरेंद्र मोदी आज पतंजलि योग पीठ में बाबा रामदेव के शिक्षण संस्थान आचार्यकुलम का उद्घाटन करेंगे। माना जा रहा है कि आचार्यकुलम के मंच से बाबा रामदेव नरेंद्र मोदी का राजतिलक करेंगे और देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की दावेदारी को पुख्ता करने करेंगे।

ज़ी मीडिया ब्यूरो
हरिद्वार : योग गुरु बाबा रामदेव और गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी आज एक मंच पर दिखेंगे। नरेंद्र मोदी आज पतंजलि योग पीठ में बाबा रामदेव के शिक्षण संस्थान आचार्यकुलम का उद्घाटन करेंगे। आचार्यकुलम में छात्रों को वैदिक और आधुनिक दोनों तरह की शिक्षा देने का प्रावधान किया गया है। इस समारोह में नरेंद्र मोदी समेत कई अति विशिष्ट मेहमानों और देश के कई बड़े संतों के शामिल होने की संभावना है। माना जा रहा है कि आचार्यकुलम के मंच से बाबा रामदेव नरेंद्र मोदी का राजतिलक करेंगे और देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की दावेदारी को पुख्ता करने करेंगे। मोदी के प्रवचन के लिए पतंजलि योगपीठ में एक भव्य पंडाल बनाया गया है जिसमें करीब 50 हजार लोगों के बैठने और करीब एक लाख लोगों के खड़े होने की व्यवस्था की गई है।
देवभूमि में नरेंद्र मोदी के आने की आहट ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के लिए नरेंद्र मोदी की यह यात्रा हालांकि गैरराजनीतिक है, लेकिन इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। कांग्रेस से छत्तीस का आंकड़ा बनने से पहले, यानी मई-जून 2011 तक बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ में भाजपा ही नहीं, सभी सियासी दलों के बड़े नेताओं का आना-जाना सामान्य सी बात हुआ करती थी, लेकिन काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ बाबा की मुहिम के बाद परिस्थितियां पूरी तरह से बदल गई हैं। पिछले दो सालों में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले राजनेताओं में मोदी ऐसे अकेले राजनेता हैं, जिनका कार्यक्रम बाबा की योगपीठ में बना है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो 2014 का लोकसभा चुनाव इसकी मुख्य वजह है।
मोदी की राष्ट्रीय राजनीति में दस्तक के बाद तय है कि मोदी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए अहम भूमिका निभाएंगे। बाबा रामदेव के कार्यक्रम में संत समाज से रू-ब-रू होने के लिए मोदी के हरिद्वार आने को भी इसी रणनीति का एक हिस्सा माना जा रहा है। वैसे भी भाजपा की अग्रिम पंक्ति में अपनी भूमिका सुनिश्चित करने के लिए मोदी के लिए यह जरूरी है कि संत समाज का आशीर्वाद भी उनके पास हो। मोदी की बाबा से जुगलबंदी के बाद अब इस बात की संभावना क्षीण हो चुकी है कि बाबा रामदेव आगामी लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल का गठन करें।