विवादास्पद बयान पर आशीष नंदी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

समाजशास्त्री एवं लेखक आशीष नंदी के विवादास्पद बयान पर जयपुर के अशोक नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। नंदी ने शनिवार को जयपुर साहित्य महोत्सव में कहा कि ज्यादातर भ्रष्ट लोग ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों के होते हैं।

जयपुर : जयपुर के अशोक नगर थाना पुलिस ने जयपुर में चल रहे पांच दिवसीय जयपुर साहित्योत्सव में शनिवार को एक सत्र में साहित्यकार आशीष नंदी पर अनूसूचित जाति, जनजाति और दलितवर्ग पर की गई विवादित टिप्पणी को लेकर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है।
अशोक नगर थाना पलिस के अनुसार जयपुर के मानसरोवर निवासी राजपाल मीणा की ओर से साहित्यकार आशीष नंदी और जयपुर साहित्योत्सव के संयोजक सुजय राय के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।
पुलिस ने आज आशीष नंदी और सुजाय राय के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 506 और अनूसूचित जाति , जनजाति अत्याचार की धारा 3 ए के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जांच कर रहे पुलिस अधिकारी सुमित गुप्ता ने कहा कि मामला दर्ज हुआ है मामले की जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि साहित्यकार आशीष नंदी ने जयपुर साहित्योत्सव के एक सत्र में बोलते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति एक पिछड़ा वर्ग के लोग जिम्मेदार है। सत्र में मौजूद पत्रकार आशुतोष ने इसका विरोध किया था।
दौसा सांसद डॉ. किरोडी लाल मीणा को नंदी के बयान की जानकारी मिलते ही जयपुर साहित्योत्सव स्थल पर पहुंच कर नंदी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। ऐसा नहीं होने पर उन्होंने धरना देने की चेतावनी दी। डा. मीणा ने कहा कि नंदी ने एक वर्ग पर जान-बुझ कर कटाक्ष किया है। सरकार को नंदी के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति की धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
इस बीच नंदी ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, ’मेरी बात को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। मेरा मकसद किसी को ठेस पहुंचाना नही था, अगर किसी को मेरी बातों से दुख पहुंचा है तो मै माफी मांगता हूं।
आशीष नंदी ने सफाई दी, ‘मेरा ऐसा मतलब नहीं था न ही मैं यह कहना चाहता था। मैंने यह कहा था, -‘ तहलका के संपादक तरुण तेजपाल के बयान से सहमत हूं कि भारत में भ्रष्टाचार समाज में समानता लाने का काम करता है। मेरा मानना है कि भ्रष्टाचार मुक्त समाज सिंगापुर की तरह निरंकुश समाज बन जाएगा।’
नंदी ने कहा कि उन्होंने ‘विचारों का गणतंत्र’ सत्र में दबे कुचले लोगों के समर्थन में बोला था। मैंने कहा था, ‘मेरे जैसे लोग भ्रष्ट बनना चाहते हैं। हम अपने बच्चों को हार्वर्ड में पढ़ने के लिए भेज सकते हैं। दूसरों को लगेगा कि हम प्रतिभा को समर्थन दे रहे हैं। यह भ्रष्टाचार नहीं लगेगा।’
‘पर जब दलित आदिवासी या ओबीसी भ्रष्ट होते हैं तो वह भ्रष्ट लगते हैं। हालांकि इस दूसरे भ्रष्टाचार से बराबरी आती है।’ नंदी ने यह भी कहा कि यदि कुछ लोगों को उनके बयान को गलत समझने से ठेस पहुंची है तो वह माफी मागते हैं। हालांकि उन्होंने अपने बयान के लिये माफी नहीं मांगी और कहा कि वह हमेशा से ऐसे समुदायों का समर्थन करते आये हैं। उन्होंने कहा कि उनका किसी समुदाय या व्यक्ति को आहत करने का इरादा नहीं था।
उधर, नंदी के इस बयान पर दिल्ली में बसपा सुप्रीमो मायावती ने संवाददाताओं से कहा कि राजस्थान सरकार को तुरंत नंदी के खिलाफ अनुसूचित जाति, जनजाति अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेजना चाहिये। साथ ही अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पी एल पूनिया ने कहा कि नंदी एक समाजशास्त्री और बुद्धिजीवी हैं पर बैद्धिक बेइमानी का इससे बड़ा बयान नहीं हो सकता। उन्होंने भी नंदी को जेल भेजे जाने की मांग की।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि किसी जाति या समुदाय को भ्रष्ट बताना गलत है। साथ ही लोजपा नेता रामविलास पासवान ने धमकी दी कि यदि नंदी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती है तो वह विरोध प्रदर्शन करेंगे।
जदयू नेता शिवानंद तिवारी ने भी नंदी से इस बयान के लिये माफी की मांग की। (एजेंसी)