close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

शिंदे अपने बयान से पलटे, कहा-आतंक का कोई रंग नहीं होता

हिंदू आतंकवाद को लेकर भाजपा और संघ परिवार के निशाने पर चल रहे केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बुधवार को कहा कि वह कांग्रेस पार्टी के इस रुख का पूर्णरूपेण समर्थन करते हैं कि आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता। ऐसा कह शिंदे अपने पूर्व के बयान ‘हिंदू आतंकवाद’ से पलट गए हैं।

ज़ी न्यूज ब्यूरो/एजेंसी

नई दिल्ली : हिंदू आतंकवाद को लेकर भाजपा और संघ परिवार के निशाने पर चल रहे केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने बुधवार को कहा कि वह कांग्रेस पार्टी के इस रुख का पूर्णरुपेण समर्थन करते हैं कि आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता। ऐसा कह शिंदे अपने पूर्व के बयान ‘हिंदू आतंकवाद’ से पलट गए हैं।
जयपुर में पिछले महीने कांग्रेस के चिन्तन शिविर के दौरान की गई टिप्पणी के बारे में पूछने पर शिन्दे ने यहां संवाददाताओं से कहा कि आतंकवाद का कोई रंग नहीं होता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी की 22 जनवरी की टिप्पणी के बाद मैं कह चुका हूं कि मेरे विचार वही हैं, जो पार्टी के हैं। हिन्दू आतंकवाद पर भाजपा और संघ परिवार ने शिन्दे को निशाने पर ले रखा है। द्विवेदी ने कहा था कि आतंकवाद को किसी धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए।
उन्होंने कहा था कि कांग्रेस आतंकवाद और किसी धर्म के बीच कोई संबंध नहीं देखती। पार्टी पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि आतंकवाद का न तो कोई धर्म है और न ही कोई रंग। कांग्रेस भगवा आतंक या हिन्दू आतंक जैसे शब्दों का इस्तेमाल कभी नहीं करती। शिन्दे के हिन्दू आतंक को लेकर दिये गये बयान को लेकर भाजपा का आरोप है कि वह सरकार की विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। भाजपा ने कहा कि इस अपमान का खामियाजा कांग्रेस को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह भुगतना होगा।
पार्टी ने कहा कि संसद के आगामी बजट सत्र में यह मुद्दा उठाया जाएगा। शिंदे के बहिष्कार के बारे में भी गंभीरता से विचार हो रहा है। जयपुर में शिंदे ने कहा था कि हमारे पास जांच रिपोर्ट है कि चाहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हो या भाजपा, उनके प्रशिक्षण शिविर हिंदू आतंकवाद को प्रोत्साहित कर रहे हैं। हम इन सब पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
शिंदे के करीबी सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्री का हिंदू आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल करने का कोई इरादा नहीं था, लेकिन कभी-कभी ऐसा हो जाता है कि अनजाने में मुंह से कुछ शब्द निकल आते हैं।