सीमा पर आधारभूत ढांचे का निर्माण हमारा अधिकार: एंटनी

लद्दाख में घुसपैठ को लेकर चीन के साथ गतिरोध समाप्ति के कुछ दिनों बाद भारत ने सीमा पर आधारभूत ढांचे के निर्माण के अपने अधिकार का बचाव किया और कहा कि सेना और वायुसेना ‘अपनी जमीन’ पर अपनी क्षमताओं को बढ़ाना जारी रखेंगी।

पणजी : लद्दाख में घुसपैठ को लेकर चीन के साथ गतिरोध समाप्ति के कुछ दिनों बाद भारत ने सीमा पर आधारभूत ढांचे के निर्माण के अपने अधिकार का बचाव किया और कहा कि सेना और वायुसेना ‘अपनी जमीन’ पर अपनी क्षमताओं को बढ़ाना जारी रखेंगी।
रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘प्रत्येक देश को अपनी जमीन पर सीमा संबंधी आधारभूत ढांचा निर्माण का अधिकार है। यदि चीन को आधारभूत ढांचे के विकास का अधिकार है तो भारत को भी यह अधिकार हासिल है। गत कुछ वर्षों से आधारभूत ढांचे का निर्माण जारी है।’ दौलत बेग ओल्डी सेक्टर में 21 दिन का गतिरोध गत पांच मई को समाप्त हुआ जब दोनों पक्ष अपनी सेनाओं की वास्तविक नियंत्रण रेखा पर स्थित अपनी पूर्व की स्थितियों पर ले जाने पर सहमत हुए।
खबरों में कहा गया है कि भारत के लद्दाख के चुमार क्षेत्र में अपना बंकर हटाने के बाद ही चीन देपसांग घाटी स्थित दौलत बेग ओल्डी सेक्टर से अपने सैनिकों को पीछे हटाने पर तैयार हुआ। हालांकि विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा है कि लद्दाख में गतिरोध समाप्त करने के लिए ‘कोई भी समझौता’ नहीं हुआ।
चीनी पक्ष की दलील है कि वे अपने क्षेत्र में जो आधारभूत गतिविधियां संचालित कर रहे हैं उनकी प्रकृति विकास संबंधी है।
एंटनी ने कहा, ‘सेना और वायुसेना (सीमा से लगे क्षेत्र) में अपनी क्षमताएं बढ़ा रही हैं और वे अपनी जमीन पर ऐसा करना जारी रखेंगी।’
यह पूछे जाने पर कि क्या भारत ने चुमार क्षेत्र में अपने बंकर ध्वस्त करने शुरू कर दिये हैं,
उन्होंने कहा, ‘विषय पर सामान्य विचार.विमर्श समाप्त हो चुका है। क्रियान्वयन वाले हिस्से को जमीन पर दोनों देशों की सेनाओं के कमांडरों को देखना है।’ रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत दृढ़ता से मानता है कि विवादों का कूटनीतिक तरीके से हल निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘भारत का मानना है कि विवादों का हल बातचीत और विचार विमर्श से निकाला जाना चाहिए। हमारे पास इन विवादों का हल निकालने के लिए अच्छी तरह से स्थापित व्यवस्था है।’
यहां आईएनएस हंस पर लड़ाकू विमान मिगजी 29के के ‘ब्लैक पैंथर्स’ स्क्वाड्रन को नौसेना में शामिल करने आये एंटनी ने कहा, ‘गतिरोध समाप्त हो चुका है और दोनों पक्ष पूर्व की स्थिति बहाल करने पर सहमत हो गए हैं।’ उन्होंने इस प्रश्न का कोई सीधा जवाब नहीं दिया कि चीनी सेना को भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने से नहीं रोक पाना क्या भारत की विफलता थी, उन्होंने कहा, ‘जो भी हुआ उसके बाद आखिरकार दोनों देश पूर्व की स्थिति बहाल करने पर सहमत हो गए हैं।’
एंटनी ने कहा कि सीमा सहयोग पर चीन के साथ बातचीत जारी है और खुर्शीद जब चीन की यात्रा पर गए थे तब भारतीय सेना का एक अधिकारी भी गया था। (एजेंसी)