‘यूरेनियम बेचने के प्रस्ताव से US में मची थी खलबली’

नेपाल के एक राजनयिक का रिश्तेदार होने का दावा करने वाले कारोबारी द्वारा 1973 में भारत के परमाणु प्रतिष्ठानों से चुराए गए यूरेनियम को बेचने के प्रस्ताव की वजह से अमेरिकी मिशनों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान अचानक तेज हो गया था।

नई दिल्ली : नेपाल के एक राजनयिक का रिश्तेदार होने का दावा करने वाले कारोबारी द्वारा 1973 में भारत के परमाणु प्रतिष्ठानों से चुराए गए यूरेनियम को बेचने के प्रस्ताव की वजह से अमेरिकी मिशनों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान अचानक तेज हो गया था।
अमेरिकी राजनयिकों के बीच बातचीत, भारतीय परमाणु प्रतिष्ठान से परामर्श और नेपाली व्यक्ति द्वारा प्रदान किये गये नमूनों के परीक्षण की श्रृंखला में हालांकि यह बात सामने आई कि यह पेशकश फर्जी थी।
विकीलीक्स द्वारा जारी किसिंगर केबल में सूचनाओं के आदान प्रदान की झलक मिलती है और इसमें भारत के संबंध का पता चलता है क्योंकि कथित यूरेनियम ‘बंबई क्षेत्र’ स्थित परमाणु संस्थानों से चोरी किया गया होने का दावा किया गया।
काठमांडो स्थित अमेरिकी दूतावास ने 26 सितंबर, 1973 को अपने विदेश विभाग के अधिकारियों को नेपाली कारोबारी जे सी ठाकुर के बारे में जानकारी दी जिसने उनसे संपर्क कर तीन किलोग्राम तक यूरेनियम प्रति महीने 40,000 डॉलर प्रति किलो की दर पर बेचने का प्रस्ताव दिया था। इस केबल के साथ पूरे घटनाक्रम की शुरुआत हुई।
केबल के अनुसार, ‘उसने संकेत दिया था कि यू-235 बंबई क्षेत्र के परमाणु ऊर्जा संस्थानों से उस तक पहुंचाया गया होगा।’ इसमें कहा गया कि ठाकुर ने विश्लेषण के लिए नमूना देने की भी पेशकश की थी।
जापान में नेपाल के राजदूत का भाई होने का दावा करने वाले ठाकुर ने अमेरिकी दूतावास में यह भी बताया था कि अगर अमेरिका सरकार तथाकथित यूरेनियम खरीदने में दिलचस्पी नहीं रखती तो वह काठमांडो में जर्मनी, चीन और जापान समेत अन्य दूतावासों को भी इसके लिए पेशकश करेगा।
अमेरिकी विदेश विभाग को भेजे गये एक अन्य संदेश में इस मामले को भारत सरकार के ध्यान में लाने के लिए सलाह मांगी गयी थी। दलील दी गयी थी कि यह कार्रवाई एक ‘गुप्त खेल’ हो सकता है।
इसमें कहा गया, ‘हमारा मानना है कि इस मामले में भारत सरकार के साथ तालमेल बैठाने से विश्वास और भरोसे का माहौल बनेगा जिसमें हम परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल पर भारतीयों के साथ काम करना चाहते हैं।’
काठमांडो से 10 अक्तूबर, 1973 को भेजे गये केबल में तथाकथित यूरेनियम का नमूना परीक्षण के लिए भेजने की बात है।
विदेश मंत्री हेनरी किसिंगर ने दिल्ली, मुंबई और काठमांडो में अमेरिकी मिशनों को 16 अक्तूबर को जानकारी दी थी कि प्रारंभिक संकेत इस तरह के हैं कि नमूना रेडियोधर्मी पदार्थ या यूरेनियम का नहीं है।
दो दिन बाद किसिंगर ने एक टेलीग्राम भेजकर जानकारी दी कि परमाणु ऊर्जा आयोग के विश्लेषण में पता चला है कि प्रारंभिक तौर पर नमूना लोहे का था जिसमें मैगनीज की थोड़ी मात्रा थी। (एजेंसी)