`पंजाब के पानी में यूरेनियम की मात्रा काफी अधिक`

पंजाब और पड़ोसी राज्‍यों के कई जगहों से बीते दिनों लिए गए पानी के सैंपल की जांच के बाद पंजाब में यूरेनियम की उच्‍च मात्रा का खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद पंजाब और इसके पड़ोसी राज्‍यों के प्रशासन पर पेयजल को दुरुस्‍त करने के लिए तत्‍काल कदम उठाने होंगे।

ज़ी न्‍यूज ब्‍यूरो
चंडीगढ़ : पंजाब और पड़ोसी राज्‍यों के कई जगहों से बीते दिनों लिए गए पानी के सैंपल की जांच के बाद पंजाब में यूरेनियम की उच्‍च मात्रा का खुलासा हुआ है। इस खुलासे के बाद पंजाब और इसके पड़ोसी राज्‍यों के प्रशासन पर पेयजल को दुरुस्‍त करने के लिए तत्‍काल कदम उठाने होंगे।
गुरुवार को आई एक रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब के कई जिलों से लिए गए पानी के सैंपल की जांच भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) में जांच की गई। इस परीक्षण में पानी के सैंपल में यूरेनियम का स्‍तर 6 से 600 हिस्‍से प्रति बिलियन (पीपीबी) पाया गया जबकि यह 60 पीपीबी से अधिक नहीं होना चाहिए।
सूबे के बठिंडा और मोगा जिले के क्षेत्र इससे सबसे ज्‍यादा प्रभावित हैं, जहां पानी में यूरेनियम की मात्रा काफी अधिक है। पंजाब से लिए गए पानी के सैंपल में से करीब 35 फीसदी से अधिक में यूरेनियम का स्‍तर तय मानक से बहुत ज्‍यादा निकला।
बार्क के विशेषज्ञों के अनुसार, पंजाब के पड़ोसी राज्‍यों हरियाणा (खासकर हिसार का क्षेत्र) और हिमाचल प्रदेश से लिए गए पानी के सैंपल में भी यूरेनियम की मात्रा पाई गई है। विशेषज्ञों ने मिट्टी में ग्रेनाइट की मौजूदगी के चलते भारी मेटल को भी इसके लिए जिम्‍मेदार ठहराया।
इन खुलासों के बाद एटोमिक इनर्जी विभाग (बार्क के जरिये) ने पंजाब में पानी के अध्‍ययन और विश्‍लेषण के लिए गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर के साथ एक एमयोयू पर समझौता किया है। एटोमिक इनर्जी कमीशन के चेयरमैन (एईसी) आरके सिन्‍हा ने इस बात की जानकारी दी है कि बार्क ने पानी से यूरेनियम को निकालने के लिए कई क्षेत्रीय प्रयोग और ओसमोसिस तकनीक का इस्‍तेमाल किया है।
सूबे के मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के समक्ष एक प्रजेटेंशन के दौरान के एईसी के चेयरमैन ने इस बात को भी रेखांकित किया कि पेयजल से अशुद्धियों को दूर करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जा सकते हैं। फसलों की उत्‍पादकता और उनके जीवन बढ़ाकर इन पर रोकथाम संभव है। चेयरमैन ने हालांकि इस बात का खंडन किया कि पंजाब के पानी में यूरेनियम की मौजूदगी के लिए खाद (फर्टिलाइजर) जिम्‍मेदार हैं। सिन्‍हा ने इस संभावना को भी खारिज किया कि यूरेनियम मिश्रित पानी के चलते मालावा क्षेत्र में बड़ी संख्‍या में कैंसर के केस सामने आ रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि यूरेनियम से किडनी खराब हो सकता है लेकिन यूरेनियम और कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं है। हालांकि उन्‍होंने यह भी कहा कि टाटा मेमोरियल हास्पिटल इस संबंध में अध्‍ययन को अंजाम देगा।
बार्क की इस रिपोर्ट के बाद मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने विशेषज्ञों से सूबे में पेयजल की गुणवत्‍ता में सुधार के लिए उचित जल शुद्धि तकनीक अमल में लाए जाने को लेकर सुझाव देने की अपील की है।
गौरतलब है कि अतीत में हुए कई शोधों के बाद पंजाब व खासकर मालवा के पानी में यूरेनियम व हैवी मैटल्स के हानिकारक स्तर तक होने का खुलासा हो चुका है।