VVIP चॉपर सौदा : इटली ने भारत को दस्तावेज देने से किया इंकार

इटली की अदालत ने शनिवार को वीवीआईपी हेलीकाप्टर सौदे में भारत के साथ दस्तावेजों को साझा करने से इंकार कर दिया। इस बीच, करीब 3600 करोड़ रुपए के वीवीआईपी हेलीकाप्टर सौदे में कथित रूप से रिश्वत देने के मामले की जांच के लिए सीबीआई और रक्षा मंत्रालय का संयुक्त दल कल इटली के लिए रवाना हो सकता है।

नई दिल्ली : वीवीआईपी हेलिकाप्टर सौदा घोटाला मामले की सुनवाई कर रही एक इतालवी अदालत ने मामले की जांच संबंधी दस्तावेज मुहैया कराने संबंधी भारत की अपील को यह कहते हुए नामंजूर कर दिया है कि ‘सूचना गोपनीय’ है।
रक्षा मंत्रालय भारतीय वायुसेना के लिए इतालवी कंपनी औगस्ता वेस्टलैंड से 12 हेलिकाप्टर खरीदे जाने के मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित सुबूत जुटाने के लिए इटली में एक संयुक्त सचिव को भेज रहा है ।
रोम में भारतीय दूतावास ने आरोपों के संबंध में फिनमेकानिका के प्रमुख गुइसेपे ओरसी की गिरफ्तारी के बाद 13 फरवरी को जांच संबंधी ब्यौरा और दस्तावेज हासिल करने के लिए अपील की थी।
आरोप है कि 3600 करोड़ रूपये के इस सौदे में 360 करोड़ रुपए की रिश्वत दी गई।
सूत्रों ने शनिवार को यहां यह जानकारी दी और बताया कि रोम में भारतीय दूतावास को ट्रिब्यूनल बुस्तो आरसिजिओ लुका लाबियान्का के जज की ओर से एक संदेश मिला है जिसमें कहा गया है कि भारतीय अपील पर सकारात्मक जवाब देना संभव नहीं है।
भारतीय दूतावास केा मिले पत्र में जज ने कहा है, ‘ जांच वास्तव में शुरुआती चरण में है, इस दौरान दंड प्रक्रिया संहिता के अनुच्छेद 329 के अनुसार सभी सूचना गोपनीय है। केवल संबंधित पक्षों और उनके वकीलों की ही सूचना तथा दस्तावेजों तक पहुंच संभव है।’
इतालवी जज ने भारतीय दूतावास को बताया कि उनका कार्यालय मामले में गोपनीयता का उपबंध समाप्त होने पर भारत की ओर से इस मामले में ‘नई अपील’ पर विचार करेगा। यहां इस मुद्दे को लेकर मची हाय तौबा के बाद भारत सरकार पहले ही मामले की सीबीआई जांच का आदेश और सौदे को रद्द करने की चेतावनी दे चुकी है।
इस बीच, रक्षा मंत्रालय संयुक्त सचिव तथा अधिप्राप्ति प्रबंधक (वायु) अरुण कुमार बल को सोमवार को इटली भेज रहा है ताकि वह सौदे के संबंध में हरसंभव तथ्यात्मक जानकारी एकत्र करने की कोशिश कर सकें।
रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को अगस्ता वेस्टलैंड को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा था कि उसके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के मद्देनजर क्यों न सौदे को रद्द कर दिया जाए। मंत्रालय ने सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। (एजेंसी)