खतरे में अर्जुन मुंडा सरकार, समर्थन वापसी का पत्र आज गवर्नर को सौंपेगी जेएमएम

झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने अर्जुन मुंडा सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर दी है। जानकारी के अनुसार, जेएमएम मंगलवार को मुंडा सरकार से समर्थन वापसी का पत्र राज्‍यपाल को सौंपेगी।

रांची : राजनीतिक अस्थिरता के लिए दुनिया में बदनाम झारखंड पिछले बारह वर्षों में आठ राजनीतिक सरकारें और दो राष्ट्रपति शासन के दौर देखने के बाद अब एक बार फिर ग्यारहवीं बार सत्ता परिवर्तन के कगार पर खड़ा है क्योंकि सत्ताधारी गठबंधन के प्रमुख सदस्य झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने अर्जुन मुंडा सरकार से समर्थन वापसी की घोषणा कर दी है। जानकारी के अनुसार, जेएमएम मंगलवार को मुंडा सरकार से समर्थन वापसी का पत्र राज्‍यपाल को सौंपेगी।
झामुमो के गठबंधन से बाहर आने के साथ ही सोमवार को राज्य में भाजपा नीत अर्जुन मुंडा सरकार अल्पमत में आ गई। दोनों पार्टियों के बीच सत्ता हस्तांतरण को लेकर विवाद पैदा हो गया था। सरकार के अल्पमत में आ जाने से राज्य में राजनीतिक संकट पैदा हो गया है।
झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन ने कहा कि हमने अर्जुन मुंडा सरकार से समर्थन वापस ले लिया है। हम मंगलवार को राज्यपाल से मुलाकात करेंगे और समर्थन वापसी का पत्र सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा के साथ दोस्ती की कोई संभावना नहीं है।
इससे पहले झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन के बेटे और राज्य के उप मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संवाददाताओं से कहा था कि हमने आज (सोमवार को) सरकार से समर्थन वापस ले लेने का फैसला लिया। सोमवार को दिन भर राजनीतिक गलियारे में गहमा गहमी चलती रही। सवेरे झामुमो कार्यकारिणी की बैठक हुई। मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा शिबू सोरेन को मनाने उनके आवास पर पहुंचे। मुलाकात के बाद मुंडा ने मीडिया को कुछ भी नहीं बताया।
रविवार की रात झामुमो ने घोषणा की थी कि उसकी कार्यकारिणी की बैठक में सोमवार को भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखने या नहीं रखने पर फैसला लिया जाएगा। गठबंधन में दरार तभी से दिखने लगी थी जब 3 जनवरी को अर्जुन मुंडा ने झामुमो को लिखित उत्तर में दोनों दलों के बीच 28 माह बाद सत्ता हस्तांतरित करने का कोई समझौता होने से इनकार कर दिया। 28 माह की अवधि 10 जनवरी को पूरी हो जाएगी।
मुंडा सरकार में उप मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत झामुमो के पांच मंत्री हैं। सितंबर 2010 को झामुमो के 18 विधायकों के समर्थन से भाजपा नीत मुंडा सरकार का गठन हुआ था। 82 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा के भी 18 विधायक हैं। इसके अलावा पार्टी को अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) के छह और जदयू के दो विधायकों का समर्थन हासिल है। विधानसभा में कांग्रेस के 12, झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक के 11, राजद के छह और अन्य छोटे दलों व निर्दलीय विधायक हैं।
झामुमो अब कांग्रेस के समर्थन से सरकार गठन के प्रयास में है। सोमवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रदीप बालमुचु ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की। उधर, झारखंड विकास मोर्चा और राष्ट्रीय जनता दल ने यहां झारखंड मुक्ति मोर्चा द्वारा अर्जुन मुंडा सरकार से समर्थन वापसी की गई घोषणा की स्वागत किया है। झाविमो के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य में झामुमो और भाजपा की गठबंधन सरकार को मौकापरस्ती का गठबंधन बताया और कहा कि इसका तो यही हश्र होना था। उन्होंने राज्य में नये विधानसभा चुनाव तत्काल कराये जाने की मांग की और कहा कि उनकी पार्टी राज्य में नए चुनावों के लिए तैयार है।
इस बीच, राष्ट्रीय जनता दल ने भी राज्य में आज मुंडा सरकार से समर्थन वापसी के झामुमो के फैसले का स्वागत किया और संकेत किए कि वह झामुमो के साथ नई सरकार के गठन में सहयोग के लिए तैयार है। राजद की विधायक दल की नेता अन्नपूर्णा यादव ने यहां कहा कि वह उनकी पार्टी झामुमो के फैसले का स्वागत करती है और भविष्य में किसी धर्म निरपेक्ष सरकार के गठन की आशा करती है।