न्यायिक हिरासत में भेजे गए संजीव भट्ट

अदालत ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की पुलिस हिरासत की याचिका ठुकरा दी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

[caption id="attachment_13999" align="alignnone" width="300" caption="न्यायिक हिरासत में संजीव भट्ट"][/caption]

अहमदाबाद : अदालत ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की पुलिस हिरासत की याचिका ठुकरा दी और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. भट्ट ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी पर वर्ष 2002 के गुजरात दंगों में संलिप्तता का आरोप लगाया था.

पुलिस ने भट्ट के सात दिनों के पुलिस हिरासत की मांग की थी. उन्हें शुक्रवार को कांस्टेबल के.डी. पंत की शिकायत पर गिरफ्तार किया गया था. अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बी.जी.दोषी ने पुलिस की अर्जी को खारिज कर दिया और भट्ट को 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया.

आज ही भट्ट की पत्नी श्वेता ने कहा था कि उसके पति के जान को खतरा है क्योंकि उन्हें शहर पुलिस की अपराध शाखा को सौंप दिया गया है. पुलिस आज दिन में भट्ट के घर की तलाशी लेने गयी थी मगर ताजा तलाशी वारंट की श्वेता की मांग पर उसे खाली हाथ लौटना पड़ा.

श्वेता ने आरोप लगाया है कि सच बोलने पर पुलिस उनके पति को प्रताड़ित कर रही है. भट्ट पर भारतीय दंड संहिता की धाराओं 341, 342, 195 और 189 के तहत मामला दर्ज किया गया है. इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता मल्लिका साराभाई और गुजरात के पूर्व डीजीपी आर.बी.श्रीकुमार भट्ट से मिलने अपराध शाखा के कार्यालय पहुंचे. उन्हें मिलने की इजाजत नहीं दी गई क्योंकि उन्होंने पहले इजाजत नहीं ली थी.

साराभाई और श्रीकुमार ने भट्ट की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की. भट्ट ने उच्चतम न्यायालय में दिये गये हलफनामे में गुजरात दंगे में मोदी की मिलीभगत होने का आरोप लगाया था. साराभाई ने कहा, ‘भट्ट की गिरफ्तारी न्याय को विकृत और विध्वंस करना है और सरकार की दादागीरी की रणनीति है. समाज के सभी सदस्यों को एक साथ आना चाहिए और इस तरह की कार्रवाइयों का विरोध करना चाहिए.’ (एजेंसी)