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राज और उद्धव के साथ आने की मांग ने पकड़ी जोर

बालासाहेब के निधन के बाद शिवसेना और महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने अब राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के आपस में हाथ मिलाने के मद्देनजर मांग को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि राज ठाकरे और उद्धव को अपने मतभेदों को भुलाकर राजनीतिक मोर्चे पर साथ आना चाहिए।

ज़ी न्‍यूज ब्‍यूरो
मुंबई : बालासाहेब के निधन के बाद शिवसेना और महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने अब राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के आपस में हाथ मिलाने के मद्देनजर मांग को लेकर दबाव बढ़ा दिया है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि राज ठाकरे और उद्धव को अपने मतभेदों को भुलाकर राजनीतिक मोर्चे पर साथ आना चाहिए।
डीएनए की एक रिपोर्ट के अनुसार, शिवसेना के एक पार्टी सदस्‍य ने कहा कि बाला साहेब के निधन के बाद मराठी मानुस खुद को अनाथ, असहाय और असुरक्षित महसूस कर रही है। इन हालात में अब दोनों भाइयों को लोगों के हित में निश्चित ही एकजुट होकर साथ आना चाहिए
शिवसेना सदस्‍य ने हालांकि ने यह भी कहा कि यदि दोनों भाई आपस में हाथ मिलाने का निर्णय करते हैं तो ऐसा वे 2014 के लोकसभा चुनाव क बाद ही करेंगे। उस समय आम चुनाव में जीते गए सीटों को ध्‍यान में रखकर निर्णय लिया जा सकता है।
उन्‍होंने कहा कि वे दोनों (राज और उद्धव) एक-दूसरे की क्षमता और शक्ति की परख करेंगे क्‍योंकि बाला साहेब के बिना यह पहला आम चुनाव होगा। संभवत: इस चुनाव के परिणाम ताकत की परख करने में मदद करेंगे।
वहीं, मनसे के एक विधायक का मानना है कि दोनों नेताओं के बीच किसी तरह का गठजोड़ भविष्‍य में ही तय होगा, आने वाले कुछ हफ्तों में नहीं। हर कोई सत्‍ता में आना चाहता है (यदि दोनों भाई साथ आते हैं तो सत्‍ता में आने की सभावना बढ़ेगी)। हालांकि, अभी यह कहना दूर की कौड़ी नजर आती है कि शिवसेना और मनसे एक हो जाएगी या उनका आपस में विलय हो जाएगा। दोनों नेताओं ने अपने-अपने राजनीतिक दलों में नेतृत्‍व को लेकर गंभीर प्रयास किए हैं। यदि दोनों दलों के बीच विलय होता है तो किस तरह सामंजस्‍य बिठाया जाएगा। यह सवाल एक मनसे के एक सक्रिय कार्यकर्ता ने उठाए हैं। मनसे नेता ने कहा कि चुनाव पूर्व सामंजस्‍य या चुनाव बाद गठबंधन संभव हो सकता है।
वहीं, शिवसेना के एक पूर्व सैनिक सतीश वालांजू का कहना है कि ऐसा (दोनों पार्टी का साथ) समय के घटनाक्रम के अनुसार होगा क्‍योकि यह आज की जरूरत है। इस पूर्व शिवसैनिक ने अपने दोस्‍तों के साथ एक जन अभियान माजी चलवल, मी महाराष्‍ट्रा की शुरुआत की। इसका उद्देश्‍य नगर निगम चुनावों से पहले राज ठाकरे और उद्धव को एकजुट करना रहा। उन्‍होंने डीएनए से कहा कि अधिकांश महाराष्‍ट्रवासी दोनों भाइयों को एक साथ देखना चाहते हैं।