विदेश मंत्री कृष्णा के खिलाफ जांच जारी रहेगी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा है कि अवैध खनन मामले में लोकायुक्त पुलिस जांच जारी रख सकती है।

ज़ी न्यूज ब्यूरो/एजेंसी

 

बंगलुरू: कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा है कि अवैध खनन मामले में लोकायुक्त पुलिस जांच जारी रख सकती है। अदालत ने इस मामले में केस को खारिज करने से इंकार कर दिया है।

 

विदेश मंत्री एस एम कृष्णा को झटका देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उनके खिलाफ लोकायुक्त पुलिस की जांच को रोकने से इनकार कर दिया। कृष्णा के खिलाफ आरोप हैं कि उन्होंने वर्ष 1999 से 2003 के बीच मुख्यमंत्री बतौर अपने कार्यकाल के दौरान वन्य क्षेत्र को गैर अधिसूचित किया था।

 

हालांकि अदालत ने कृष्णा को आंशिक राहत देते हुए राज्य सरकार के स्वामित्व वाली मैसूर मिनरल्स लिमिटेड के कुप्रबंधन के आरोपों को खारिज कर दिया, जो अनेक कंपनियों को लौह अयस्क की आपूर्ति करने के लिहाज से राज्य की नोडल इकाई है।

 

न्यायमूर्ति एन आनंद ने कृष्णा की याचिका पर फैसला सुनाया। कृष्णा ने अपने खिलाफ एक निजी शिकायत पर दिसंबर 2011 में लोकायुक्त की विशेष अदालत द्वारा शुरू की गयी कार्यवाही को रद्द करने का अनुरोध किया था।

 

अदालत ने लोकायुक्त पुलिस को खनिज संपन्न क्षेत्र में वन्य भूमि को गैर अधिसूचित करने से संबंधित आरोपों में जांच जारी रखने की अनुमति दी।

 

अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कृष्णा ने संवाददाताओं से कहा, ‘मेरा विचार है कि मेरे वकील फैसले के विवरण को देखेंगे और उचित निर्णय लेंगे।’

 

क्या यह उनके लिए झटके की बात है, इस बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा, ‘‘जब तक मैं पूरा फैसला नहीं देख लेता, मुझे लगता है कि मैं इस बारे में टिप्पणी नहीं कर सकूंगा।’ जब कृष्णा से पूछा गया कि यदि विपक्ष ने उनके इस्तीफे की मांग की तो उनकी प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर सीधा जवाब देने से बचते हुए उन्होंने कहा कि जब इस तरह की मांग होगी तब देखेंगे।

 

लोकायुक्त अदालत के आदेश को चुनौती देने संबंधी कृष्णा की याचिका को विचारार्थ मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर को उनके खिलाफ प्राथमिकी पर रोक लगा दी थी। न्यायमूर्ति आनंद ने कहा कि वन्य भूमि को गैर अधिसूचित करने के मामले में याचिकाकर्ता के खिलाफ शिकायत उनके खिलाफ अपराध और आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 156  के तहत जांच का आधार होगी।

 

एमएमएल के कथित कुप्रबंधन के संबंध में न्यायमूर्ति ने कहा, ‘मेरा मानना है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एमएमएल के प्रबंधन में कथित गैरकानूनी गतिविधियों से संबंधित आरोप किसी संज्ञेय अपराध का आधार नहीं हैं और इसमें जांच की जरूरत नहीं है।’

 

सामाजिक कार्यकर्ता टी जे अब्राहम ने लोकायुक्त अदालत के समक्ष निजी शिकायत दाखिल की थी। लोकायुक्त अदालत ने जांच का आदेश दिया जिसके बाद लोकायुक्त पुलिस ने आठ दिसंबर को कृष्णा तथा दो अन्य पूर्व मुख्यमंत्रियों धरम सिंह व एचडी कुमारस्वामी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।