निद्रा विकार को लेकर रहें सावधान

नींद से संबंधित छोटी से छोटी समस्या के प्रति उदासीनता से चिकित्सक बचने की राय देते हैं।

नई दिल्ली: नींद से संबंधित छोटी से छोटी समस्या के प्रति उदासीनता से चिकित्सक बचने की राय देते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि एक तिहाई मनुष्यों में स्पष्ट तौर पर नींद से संबंधित 80 विकारों में से कोई न कोई बीमारी पाई जाती है, जिसमें से कुछ बहुत ही हानिकारक हो सकते हैं। लेकिन सबसे अच्छी बात है कि इसका इलाज भी हमारे हाथ में ही है।
डॉक्टरों के मुताबिक आपके सोने के तरीके पर ही आपका स्वास्थ्य निर्भर करता है। यह हमारे जीवन का ऐसा हिस्सा है जिसमें हम समझौता नहीं कर सकते। इसलिए नींद से संबंधित विकार को लापरवाही से न लें।
नींद के विकार के कारण और कई तरह की समस्याएं जन्म ले सकती हैं जिनमें जीवन की गुणवत्ता में कमी आना, स्मरण शक्ति का कमजोर होना, घबराहट, सुस्ती, तनाव, पारिवारिक कलह, ठीक से तकिया न लगाने पर होने वाली दिक्कतें, मधुमेह, हृदयरोग तथा दिल का दौरा पड़ना आदि परेशिानियां हो सकती हैं। मनचंदा ने आगे बताया कि 33 फीसदी सड़क हादसे वास्तव में पूरी नींद न लेने के कारण होते हैं।
भारत में फिलिप्स तथा नील्सन कंपनी द्वारा हाल ही में किए गए एक अध्ययन में नींद से संबंधित कुछ रोचक तथ्य सामने आए हैं। इस अध्ययन के अनुसार 93 फीसदी लोगों को नींद की कमी की शिकायत है। लोगों का कहना है कि वे आठ घंटे से भी कम सो पाते हैं। इन लोगों में केवल दो फीसदी ही इसके लिए चिकित्सक के पास जाते हैं।

-93 फीसदी लोग मानते हैं कि वे पूरी नींद नहीं ले पाते हैं। लोगों ने कहा कि वे रात में आठ घंटे से भी कम सो पाते है।
-87 फीसदी लोगों को लगता है कि नींद की कमी के कारण स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
-72 फीसदी लोग नींद के बीच में एक से तीन बार जगते हैं।
-62 फीसदी लोग प्रतिरोधात्मक श्वासरोधी बीमारी से ग्रसित हैं। इसमें सोते वक्त 10 सेकेंड या उससे थोड़ेअधिक वक्त के लिए सांस रुक जाती है।
-57 फीसदी लोगों का मानना है कि नींद की कमी के कारण उनका काम प्रभावित होता है।
-38 फीसदी लोगों ने काम के दौरान अपने सहयोगियों को सोते हुए देखा है।
-33 फीसदी लोग नींद में खर्राटे लेते है। इनमें से आधे लोगों के खर्राटे की आवाज जागते वक्त उनकी आवाज से तीव्र होती है।
-19 फीसदी लोगों का मानना है कि नींद की कमी के कारण परिवार के साथ संबंध प्रभावित होता है।
-11 फीसदी लोग नींद की कमी के कारण दफ्तर से छुट्टी ले लेते हैं।
-केवल दो फीसदी लोगों ने नींद की कमी को लेकर चिकित्सक से बात की है। (एजेंसी)