स्वावलंबन पेंशन योजना के तहत 2014-15 तक 80 लाख लोगों को लाने का लक्ष्य : पीएफआरडीए

सरकार ने वित्तीय समावेश की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जन-धन योजना का हिस्सा स्वावलंबन पेंशन योजना के तहत चालू वित्त वर्ष के अंत तक करीब 80 लाख अंशधारकों को लाने का लक्ष्य रखा है। यह बात आज पीएफआरडीए के अध्यक्ष ने कही। पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष आर वी वर्मा ने स्कॉच सम्मेलन में कहा ‘यह जन-धन योजना का अभिन्न हिस्सा है।

स्वावलंबन पेंशन योजना के तहत 2014-15 तक 80 लाख लोगों को लाने का लक्ष्य : पीएफआरडीए

नई दिल्ली : सरकार ने वित्तीय समावेश की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जन-धन योजना का हिस्सा स्वावलंबन पेंशन योजना के तहत चालू वित्त वर्ष के अंत तक करीब 80 लाख अंशधारकों को लाने का लक्ष्य रखा है। यह बात आज पीएफआरडीए के अध्यक्ष ने कही। पेंशन कोष नियामक एवं विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष आर वी वर्मा ने स्कॉच सम्मेलन में कहा ‘यह जन-धन योजना का अभिन्न हिस्सा है। स्वावलंबन उत्पाद उसमें शामिल है। स्वावलंबन योजना के तहत हमारे अंशधारकों की संख्या करीब 30 लाख है।’ उन्होंने कहा ‘‘हमने चालू वित्त वर्ष के अंत तक 80 लाख अंशधारक बनाने का लक्ष्य रखा है।’’ उन्होंने कहा कि पेंशन योजना के तहत आबादी के सबसे निचले तबके को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

वर्मा ने कहा कि बैंकिंग उद्योग इस योजना के तहत और लोगों को शामिल करने के लिए पीएफआरडीए और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है। इससे पहले वर्मा ने ‘न्यूनतम सरकारी दखल के साथ अधिकतम कामकाज’ पर आयोजित स्कॉच सम्मेलन में कहा ‘‘वित्तीय समावेश का मिशन स्वरूप बड़ी तब्दीली लाएगा। इसे मिशन का स्वरूप देना होगा वर्ना यह काम नहीं कर पाएगा।’’ उन्होंने कहा कि जन-धन योजना के तहत आने वाले उत्पाद बड़ी आबादी तक उपलब्ध होने चाहिए और ये आर्थिक तौर पर व्यावहारिक होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि वित्तीय क्षेत्र की पहुंच और बढ़ाने की जरूरत है ताकि इसका फायदा समाज के बड़े तबके को मिले। वर्मा ने कहा ‘बैंकों को वास्तविक रूप से नीचे तक पहुंचना होगा। उत्पाद सस्ते हों और इन्हें कम से कम लागत पर मुहैया कराया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि हालांकि इस संबंध में कुछ चुनौतियां हैं। वर्मा ने कहा ‘यह वित्तीय क्षेत्र का हस्तक्षेप है इसलिए यह सुधार केंद्रित होना चाहिए और यह वाणिज्यिक तौर पर व्यावहारिक, सामाजिक रूप से स्वीकार्य और वहनीय होना चाहिए। हम लाभार्थियों को प्रोत्साहन दे रहे हैं और ज्यादा धन सृजन की कोशिश कर रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि इस नए स्वरूप के वित्तीय समावेश से आखिरी व्यक्ति तक संपर्क वास्तविकता बन सकती है और इसका कोई विकल्प नहीं है कि इस योजना को सफल बनाने के लिए तेज सूचना प्रौद्योगिकी वाली प्रक्रिया अपनाई जाए।