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केजी-डी6 : तीसरे पंच को लेकर उच्चतम न्यायालय में जाएगी सरकार

पेट्रोलियम मंत्रालय आस्ट्रेलिया के पूर्व न्यायाधीश के स्थान पर किसी अन्य पंच की नियुक्ति के लिए उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है। उस न्यायाधीश ने केजी-डी6 गैस विवाद में पहले पंच बनने से इनकार कर दिया था, लेकिन इस मामले में परियोजना की भागीदार निजी कंपनियों के आग्रह पर उसने अपना मन बदल दिया।

केजी-डी6 : तीसरे पंच को लेकर उच्चतम न्यायालय में जाएगी सरकार

नई दिल्ली : पेट्रोलियम मंत्रालय आस्ट्रेलिया के पूर्व न्यायाधीश के स्थान पर किसी अन्य पंच की नियुक्ति के लिए उच्चतम न्यायालय में अपील कर सकता है। उस न्यायाधीश ने केजी-डी6 गैस विवाद में पहले पंच बनने से इनकार कर दिया था, लेकिन इस मामले में परियोजना की भागीदार निजी कंपनियों के आग्रह पर उसने अपना मन बदल दिया।

केजी-डी6 गैस ब्लाक में लागत निकालने को लेकर सरकार और कंपनी के बीच विवाद के बीच शीर्ष अदालत ने 29 अप्रैल को आस्ट्रेलिया उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश माइकल हडसन मैकह्यूज को पंचनिर्णय की कार्यवाही के लिए तीसरा पंच नियुक्त करने का निर्णय किया था।

सूत्रांे ने बताया कि मैकह्यूज ने 20 मई को उस न्यायाधिकरण के चेयरमैन के रूप में अपना नाम वापस ले लिया था। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस मामले में उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एसपी भड़ूचा को और सरकार ने उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वी एन खरे को अपनी ओर से पंच नामित किया है। तीसे पंच बनाए गए मैकह्यूज ने कहा था कि उन्हें इस काम के लिए चुनने से पहले उनसे संपर्क नहीं किया गया था।

हालांकि, बाद में केजी-डी6 परियोजना में के भागीदारों के वकील द्वारा खिले पत्र के बाद मैकह्यूज पंच बनने के लिए तैयार हो गए।

सूत्रों ने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय का मानना है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त कोई पंच एक बार नाम वापस लेने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए नहीं कह सकता।  इसके अलावा मंत्रालय को केजी-डी6 के भागीदारों व तीसरे पंच के बीच ईमेल के आदान प्रदान को लेकर भी संदेह है, क्योंकि इसके बाद ही मैकह्यूज न्यायाधिकरण का चेयरमैन बनने को सहमत हुए। सूत्रों ने कहा कि सरकार पहले ही उन्हें इस मामले में आगे नहीं बढ़ने को कह चुकी है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने विधि मंत्रालय से तात्कालिक आधार पर तीसरे पंच की नियुक्ति के लिए पंचाट एवं सुलह सफाई अधिनियम की धारा 11 और धारा 15:2: के तहत याचिका दायर करने की अनुमति मांगी है। नवंबर, 2011 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने सरकार के खिलाफ पंच निर्णय की प्रक्रिया शुरू की थी।

केजी-डी6 का उत्पादन लक्ष्य से कम रहने की वजह से सरकार ने रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से दिखाई गयी 1.005 अरब डालर की लागत नामंजूर कर दी। कंपनी स्वीकृत लागत को गैस की बिक्री से निकाल कर बाकी लाभ में सरकार को हिस्सा देती है।

केजी डी6 ब्लाक के मुख्य क्षेत्र से गैस का उत्पादन 8 करोड़ घनमीटर प्रतिदिन के स्तर पर होना चाहिए था पर यह उसका चौथाई भी नहीं है। सरकार 31 मार्च, 2014 तक इस परियोजना में निजी कंपनी को गैस बिक्री से कुल मिला कर 2.37 अरब डॉलर का खर्च वसूलने से रोक चुकी है।