close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

वैश्विक व्यापार प्रणाली में अपनी भूमिका तय करे भारत: केरी

विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत द्वारा कड़ा रूख अपनाए जाने के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि वैश्विक व्यापार प्रणाली में भारत को अपनी भूमिका तय करनी चाहिए।

नई दिल्ली : विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत द्वारा कड़ा रूख अपनाए जाने के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने कहा है कि वैश्विक व्यापार प्रणाली में भारत को अपनी भूमिका तय करनी चाहिए।

भारत के लिए अपनी आधिकारिक यात्रा से पहले केरी ने कहा, हम जबकि दुनियाभर में व्यापार व निवेश के उदारीकरण के लिए अपने व्यापारिक भागीदारों के साथ काम कर रहे हैं, ऐसे में भारत को यह तय करना चाहिए कि वैश्विक व्यापार प्रणाली में वह कहां फिट बैठता है। नियम आधारित व्यापारिक प्रणाली व प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की इच्छा इसके लिए महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। केरी ने समाचार पत्र में एक लेख में यह बात कही है। इस लेख को लिखने में वाणिज्य मंत्री पेनी प्रिट्जकर ने भी सहयोग दिया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री केरी एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत यात्रा पर आ रहे हैं। वह तीन दिन की आधिकारिक यात्रा के दौरान नयी दिल्ली में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ पांचवी भारत अमेरिका रणनीतिक वार्ता की सहअध्यक्षता करेंगे।

भारत ने एक कड़े संदेश में डब्ल्यूटीओ को स्पष्ट कर दिया है कि वह व्यापार सुगमता करार (टीएफए) का तब तक अनुमोदन नहीं करेगा जब तक कि उसके खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण के मुद्दे का निपटान नहीं हो जाता। टीएफए पर संधि के लिए समयसीमा कल तक है। इस बीच, जिनेवा में विकसित देशों व भारत सहित उभरते देशों के बीच मतभेदों को निपटाने के लिए गहन विचार विमर्श व बैठकों का दौर चल रहा है।

सूत्रों ने बताया कि डब्ल्यूटीओ के महानिदेशक राबटरे एजेवेडो जिनेवा में अधिकारियों के साथ मुलाकात कर रहे हैं जिससे खाद्य सुरक्षा के मुद्दे का हल निकाला जा सके। भारत अनाज के भंडारण के लिए डब्ल्यूटीओ नियमों में संशोधन की मांग कर रहा है। यह मुद्दा भारत के खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के लिए काफी महत्वपूर्ण है। डब्ल्यूटीओ के मौजूदा नियम सब्सिडी को कुल खाद्यान्न उत्पादन मूल्य के 10 प्रतिशत पर सीमित करते हैं। हालांकि इसकी गणना दो दशक पुराने मूल्य पर की जाती है।

भारत 1986-88 के आधार वर्ष में बदलाव की मांग कर रहा है। भारत चाहता है कि यह बदलाव महंगाई व मुद्रा में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर किया जाए। इसके अलावा भारत एक संस्थागत व्यवस्था, मसलन कृषि पर समिति का एक प्रतिबद्ध विशेष सत्र चाहता है जिससे खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण के मुद्दे का हल निकल सके।