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भारत ने गरीबों की सुरक्षा को WTO में कड़ा रूख अपनाया : PM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सरकार ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की हाल की बैठक में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रचार पाने के बजाय देश के गरीब लोगों के हितों की रक्षा के लिये कड़ा रूख अपनाने का विकल्प चुना।

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि सरकार ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की हाल की बैठक में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रचार पाने के बजाय देश के गरीब लोगों के हितों की रक्षा के लिये कड़ा रूख अपनाने का विकल्प चुना।

प्रधानमंत्री ने यहां भाजपा राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कहा, ‘डब्ल्यूटीओ के बारे में भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया। हम अपने किसानों के पक्ष को चुनें या फिर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में अच्छा प्रचार पाने के लिये काम करें? हमने किसानों का हित चुना। हमने देश के गरीब लोगों के हित का विकल्प चुना।’ भारत ने पिछले महीने जिनेवा में डब्ल्यूटीओ की बैठक में अपनी खाद्य सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रख अपनाया जिससे बातचीत असफल हो गई। भारत ने डब्ल्यूटीओ की व्यापार सरलीकरण समझौते (टीएफए) की पुष्टि करने से इनकार कर दिया। इस समझौते के बाद कृषि उत्पादों के आयात पर सीमा शुल्क प्रक्रिया आसान होगी जिसका लाभ विकसित देशों को मिलेगा।

डब्ल्यूटीओ में भारत के रूख की अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने कड़ी आलोचना की है। उसने कहा कि भारत के इस रूख से डब्ल्यूटीओ का बाली समझौता खतरे में पड़ जायेगा और वैश्विक बहुस्तरीय व्यापार संस्था की साख को नुकसान पहुंचेगा। मोदी ने इस मामले में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठब्ंधन सरकार पर भी हमला बोला।

उन्होंने कहा, ‘जिन लोगों ने खाद्य सुरक्षा के नाम पर जनता से वोट मांगे, उन्हीं लोगों ने समझौते पर हस्ताक्षर किये और गरीब लोगों के हितों की बलि चढाई।’ पूर्व वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने पिछले साल बाली में डब्ल्यूटीओ की बैठक में समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। इसमें अन्य बातों के अलावा 31 जुलाई 2014 को टीएफए पर हस्ताक्षर करने पर सहमति जताई गई थी।

इस समझौते में एक छूट प्रावधान भी शामिल किया गया कि भारत का अनाज भंडारण उसके खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम के लिये आवश्यक है और अगले चार साल यानी 2017 तक इस पर सवाल खड़ा नहीं किया जायेगा। भारत इस मामले में डब्ल्यूटीओ द्वारा तय 10 प्रतिशत खाद्य सब्सिडी की अधिकतम सीमा को भी यदि तोड़ता है तब भी उसके खिलाफ कोई सदस्य देश सवाल नहीं उठायेगा।
भारत ने जिनेवा की बैठक में इस बात पर अड़ा रहा कि टीएफए के साथ साथ खाद्य सुरक्षा उपायों के लिये सार्वजनिक भंडारण व्यवस्था के स्थायी समाधान को भी तलाशा जाना चाहिये।