नरेगा में लचीलापन की जरूरत, राज्यों में लक्ष्य नहीं हुए पूरे: रमेश

केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने संप्रग के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम नरेगा में लचीलापन लाने की वकालत करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम अभी तक किसी भी राज्य में मजदूरों को पक्की आय की, ठोस सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण तथा ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के अपने उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सका है।

नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने संप्रग के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम नरेगा में लचीलापन लाने की वकालत करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम अभी तक किसी भी राज्य में मजदूरों को पक्की आय की, ठोस सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण तथा ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाने के अपने उद्देश्यों को हासिल नहीं कर सका है। रमेश ने कहा कि सभी रोजगार उन क्षेत्रों में सृजित नहीं किया जा सकता, जहां युवा उसे चाहते हैं। उन्होंने एक ऐसी नीति के जरिये सभी राज्यों से पलायन को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया जो प्रवासियों के खिलाफ भेदभाव को हटाये।
ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा, ‘नरेगा के तीन उद्देश्य हैं। पहला, पक्की मजदूरी वाला रोजगार उपलब्ध कराना, दूसरा, टिकाउ सामुदायिक संपत्ति का निर्माण तथा तीसरा ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाना है। जिन राज्यों में नरेगा सफल है, वहां तीन में से केवल दो उद्देश्य पूरे हुए हैं। ऐसा कोई राज्य नहीं है जहां तीनों उद्देश्य पूरे हुए हों।’ भारतीय श्रम एवं रोजगार रिपोर्ट-2014 जारी किये जाने के मौके पर उन्होंने यह बात कही।
इसका उदाहरण देते हुए रमेश ने कहा कि जहां आंध्र प्रदेश पक्की मजदूरी वाला रोजगार उपलब्ध कराया गया और टिकाउ संपत्ति सृजित हुई, वहीं स्थानीय रूप से चुने गये ग्राम पंचायतों की अनदेखी हुई। रमेश ने कहा कि मध्य प्रदेश तथा राजस्थान जैसे कुछ राज्यों में ग्रामीण पंचायतों को सशक्त बनाया गया, पक्की मजदूरी वाला रोजगार सृजित किया गया लेकिन टिकाउ संपत्ति सृजित नहीं हो पायी।
उन्होंने कहा, छह साल समाप्त होने के बाद यह हमारे लिये महत्वपूर्ण है कि हम थोड़ा रूककर खुद से पूछे कि अगले चरण में नरेगा का उपयोग कैसे होगा। हमें कानून में लचीलापन लाने की जरूरत है। मंत्री ने एक ऐसी नीति के जरिये सभी राज्यों से पलायन को प्रोत्साहित करने का आह्वान किया जो प्रवासियों के खिलाफ भेदभाव को हटाये। (एजेंसी)