‘निजी इस्तेमाल वाली कोयला खानों का उत्पादन लक्ष्य से कम रहा’

ऐसे समय जबकि उच्चतम न्यायालय निजी इस्तेमाल के लिए आवंटित कोयला प्रखंडों पर फैसला करने वाला है, कोयला मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को बताया है कि जिन कंपनियों को अपने स्वयं के संयंत्र के उपयोग के लिए कोयला खानों का आवंटन हुआ है उन्हें 2013-14 में सिर्फ 3.9 करेाड़ टन कोयले का उत्पादन किया है जो तय लक्ष्य से कम है।

‘निजी इस्तेमाल वाली कोयला खानों का उत्पादन लक्ष्य से कम रहा’

नई दिल्ली : ऐसे समय जबकि उच्चतम न्यायालय निजी इस्तेमाल के लिए आवंटित कोयला प्रखंडों पर फैसला करने वाला है, कोयला मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को बताया है कि जिन कंपनियों को अपने स्वयं के संयंत्र के उपयोग के लिए कोयला खानों का आवंटन हुआ है उन्हें 2013-14 में सिर्फ 3.9 करेाड़ टन कोयले का उत्पादन किया है जो तय लक्ष्य से कम है।

इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों ने कहा कि वित्त वर्ष 2013-14 में ऐसी कंपनियों से के लिए 5 करोड़ टन कोयले के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था। इस बीच, उच्चतम न्यायालय ने कहा कि 1993 से 2010 के बीच सभी कोयला खानों का अवंटन गैरकानूनी और मनमाने तरीके से किया गया है जिससे 218 कोयला प्रखंडों का भविष्य अधर में लटक गया है।

सूत्रों ने बताया कि कुल खानों में से 40 कोयला प्रखंड उत्पादन कर रहे हैं और 6 चालू वित्त वर्ष में परिचालन में आ जाएंगे। सरकार ने उच्चतम न्यायालय से कहा कि वह सभी 218 कोयला प्रखंडों की नीलामी करना चाहता है जिन्हें गैरकानूनी आवंटन करार दिया गया है। हालांकि केंद्र चाहता है कि 40 कोयला प्रखंडों का अवंटन रद्द न करने की छूट दी जाए जहां उत्पादन चल रहा है या वे निर्धारित बिजली संयंत्रों को अपूर्ति करने की स्थिति में तैयार खड़े हैं। मंत्रालय ने कहा कि निजी कोयला खानों से जुड़े मामले अदालत में लंबित होने जैसी वजहों से भी उत्पादन कम हुआ। चालू वित्त वर्ष में ऐसी खानों से उत्पादन 5.3 करोड़ टन तक होने की संभावना है।