बड़ौदा की गलियों से निकल बेंगलुरु के बोर्डरूम पहुंचे सिक्का विशाल

भारत की दूसरी सबसे बड़ी साफ्टवेयर सेवा कंपनी इन्फोसिस की कमान संभालने जा रहे विशाल सिक्का ने बड़ौदा की गलियों से निकलकर यहां तक की यात्रा की है। सिक्का ने स्टैंडफोर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी किया और प्रौद्योगिकी कंपनी सैप को उबारने में उनकी अहम भूमिका रही।

बेंगलुरु : भारत की दूसरी सबसे बड़ी साफ्टवेयर सेवा कंपनी इन्फोसिस की कमान संभालने जा रहे विशाल सिक्का ने बड़ौदा की गलियों से निकलकर यहां तक की यात्रा की है। सिक्का ने स्टैंडफोर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी किया और प्रौद्योगिकी कंपनी सैप को उबारने में उनकी अहम भूमिका रही।

सैतालिस वर्षीय सिक्का के लिए इन्फोसिस को उबारने का काम सबसे कठिन काम साबित हो सकता क्योंकि वह कंपनी की कमान एक अगस्त को संभालेंगे। वर्ष 1981 में एनआर नारायणमूर्ति द्वारा स्थापित इन्फोसिस से वरिष्ठ स्तर पर कार्यकारी कंपनी छोड़ रहे हैं। साथ ही कंपनी को टीसीएव और एचसीएल टेक से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।

विशाल सिक्का ने यहां संवाददाताओं को बताया कि मैं यह जिम्मेदारी लेते हुए बहुत खुश हूं। मैं हमेशा से ही यह जानने का इच्छुक रहा हूं कि इन्फोसिस कैसे शिक्षा व सीखने पर जोर देती है। नारायणमूर्ति की तरह मैं भी एक शिक्षक का बेटा हूं। मेरी मां राजकोट में अध्यापिका थीं और मेरे पिता भारतीय रेलवे में इंजीनियर थे। पंजाबी परिवार में जन्मे सिक्का ने वडोदरा में रोजरी हाई स्कूल में पढ़ाई की। उन्होंने एमएस विश्वविद्यालय, वडोदरा से कंप्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातक किया और सिराकस विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान में बीएससी की पढ़ाई की। सिक्का ने स्टैंनफोर्ड विश्वविद्यालय से पीएचडी की। (एजेंसी)

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