`अमिताभ बच्चन ने अभिनेताओं को 60 वर्ष के बाद भी दिया जिन्दगी जीने का सबक`

हास्य एवं चरित्र भूमिकाओं के लिए मशहूर फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा अभिनेता अमिताभ बच्चन के मुरीद हैं और मानते हैं कि किसी भी अभिनेता को एक बार अमित जी के साथ जरूर काम करना चाहिये। एक अभिनेता को उनसे अभिनय की बारीकियों के अलावा सबसे महत्वपूर्ण चीज अनुशासन सीखने को मिलती है।

नई दिल्ली : हास्य एवं चरित्र भूमिकाओं के लिए मशहूर फिल्म अभिनेता संजय मिश्रा अभिनेता अमिताभ बच्चन के मुरीद हैं और मानते हैं कि किसी भी अभिनेता को एक बार अमित जी के साथ जरूर काम करना चाहिये। एक अभिनेता को उनसे अभिनय की बारीकियों के अलावा सबसे महत्वपूर्ण चीज अनुशासन सीखने को मिलती है।
रजत कपूर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘आंखों देखी’ के प्रचार के सिलसिले में राजधानी आये फिल्म के मुख्य अभिनेता संजय मिश्रा ने बताया, ‘अमित जी ने फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेताओं को सिखाया है कि 60 वर्ष के बाद भी कैसे जिया जाता है। जितना अनुशासन, मेहनत और लगन उनके काम में होती है उससे सभी को काफी कुछ सीखने को मिलता है।’ उन्होंने फिल्म भूतनाथ रिटर्न में अमिताभ बच्चन के साथ के अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा, ‘इस उम्र में भी अमितजी सेट पर आने का जो समय होता है उससे पहले आते हैं और सभी के साथ घुल मिल कर काम करने का उनका अपना विशेष अंदाज है। जितनी मेहनत आज भी वह करते हैं वह सभी के लिए सीख है।’
संजय ने बताया कि एक बार हल्के फुल्के क्षण में उन्होंने अमिताभ बच्चन से कहा, ‘बहुत खतरनाक हैं आप। आपका जो आभा मंडल है वह सामने वाले कलाकार के दिमाग पर चढ़ जाता है। सामने वाले कलाकार पर आपके एक्टिंग का भूत सिर चढ़ कर बोलने लगता है।’ संजय कहते हैं कि अमित जी ने हम अभिनेताओं के सामने यह आदर्श प्रस्तुत किया है कि 60 वर्ष के बाद जिन्दगी कैसे जी जाती है। ‘इस मायने में उन्होंने हमें जीना सिखाया है।’
फिल्म ‘आंखों देखी’ के बारे संजय ने कहा कि रजत कपूर ने उन्हें (संजय मिश्रा) ध्यान में रखकर फिल्म लिखी जिसमें उनका चरित्र ‘बाबूजी’ का है । यह देश के लगभग 65 प्रतिशत बाबूजी की कहानी है कि जो कुछ उन्होंने देखा है सिर्फ उसी पर यकीन करता है। उनकी इस सोच की वजह से घर वालों को जिन परेशानियों का सामना करना पड़ता है, यह फिल्म उसी की दास्तां बयां करता है। संजय मानते हैं कि आज फिल्में काफी बदल गई हैं और उसमें वास्तविकता का पुट बढ़ गया है। साथ ही दर्शकों की रचियां भी परिमार्जित हो गई हैं जिन्हें पुराने तरीके से मनोरंजन नहीं परोसा जा सकता है।
पटना में जन्मे संजय मिश्रा ने 12वीं के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में अभिनय का प्रशिक्षण लिया और 90 के दशक के आरंभ में मुंबई चले गये। मुंबई में वह फिल्मों से पहले विज्ञापनों और धारावाहिकों के जरिये काफी चर्चित नाम हो गये थे। उनकी चर्चित धारावाहिकों में ‘सॉरी मेरी लॉरी’, ‘आफिस ऑफिस’, ‘लापतागंज’, ‘चाणक्य’ इत्यादि हैं जबकि उनकी कुछ चर्चित फिल्मों में ‘सत्या’, ‘दिल से’, ‘साथिया’, ‘बंटी और बबली’, ‘गोलमाल’, ‘बांबे टू गोवा’, ‘गुर’, ‘गोलमाल रिटर्न्‍स’, ‘सन ऑफ सरदार’, खिलाड़ी 786’, जॉली एलएलबी’, सिंह साहेब द ग्रेट’, ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ इत्यादि हैं।
उनकी आने वाली फिल्मों में अमिताभ बच्चन के साथ ‘भूतनाथ रिटर्न्‍स’, सलमान खान के साथ ‘किक’, यशराज बैनर की फिल्म ‘दम लगा के ऐसा’ और गायक अभिनेता मनोज तिवारी के साथ ‘ग्लोबल बाबा’ इत्यादि प्रमुख हैं। हाल ही में संजय ने पहली बार एक फिल्म ‘प्रणाम वालेकुम’ का निर्देशन किया है जिसमें वह अभिनेता के बतौर भी शामिल हैं। संजय का कहना है कि अगर यह फिल्म हिट हुई तो इसका ‘सिक्वल’ वह बनाना चाहेंगे जिसका नाम होगा ‘वालेकुम प्रणाम’। (एजेंसी)

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