सांप्रदायिक हिंसा मुद्दा: कांग्रेस-बीजेपी में तकरार, विभाजनकारी राजनीति का मढ़ा दोष

देश में कथित रूप से बढ़ती सांम्प्रदायिक दंगों की घटनाओं के मुद्दे पर लोकसभा में बुधवार को सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों के बीच जमकर तकरार हुई। दोनों ने एक-दूसरे पर धुव्रीकरण का एजेंडा आगे बढ़ाने का आरोप लगाया।

सांप्रदायिक हिंसा मुद्दा: कांग्रेस-बीजेपी में तकरार, विभाजनकारी राजनीति का मढ़ा दोष

नई दिल्ली : देश में कथित रूप से बढ़ती साम्प्रदायिक दंगों की घटनाओं के मुद्दे पर लोकसभा में बुधवार को सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के सदस्यों के बीच जमकर तकरार हुई। दोनों ने एक-दूसरे पर धुव्रीकरण का एजेंडा आगे बढ़ाने का आरोप लगाया।

कांग्रेस के एमआई शनवास और मुहम्मद असरारूल हक की ओर से सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं से निपटने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किए जाने की आवश्यकता के बारे में उठाई गई चर्चा की शुरुआत करते हुए लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि नरेन्द्र मोदी सरकार बनने के बाद के दो महीनों में देश के विभिन्न हिस्सों में 600 से अधिक दंगे हुए हैं।

सत्तारूढ़ पक्ष के जबर्दस्त विरोध के बीच उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और उससे जुड़े संगठन सत्ता में बने रहने के लिए ‘समाज को बांटने’ का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर इसे रोका नहीं गया तो पछताना पड़ेगा। विहिप, बजरंग दल और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का उल्लेख करते हुए खड़गे ने कहा कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद से ‘साम्प्रदायिक शक्तियां’ उत्साहित हो गई हैं और उन्हें लगता है कि उनके पास राजनीतिक शक्ति है और वह उन्हें संरक्षण प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे उन राज्यों में साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं हो रही हैं जहां चुनाव होने वाले हैं।

भाजपा के योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि आप धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करते हैं लेकिन आप साम्प्रदायिकता का एजेंडा लागू करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान हुए साम्प्रदायिक दंगों में हजारों लोग मारे गए और साढ़े तीन लाख कश्मीरी पंडित अपने ही देश में शरणार्थी बन गए लेकिन कांग्रेस पार्टी ने संसद में उस पर कभी चर्चा नहीं की।

तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि हम जनप्रतिनिधियों को सुनिश्चित करना चाहिए कि देश के लोग सुरक्षित रहे, शांतिपूर्ण ढंग से रहे और विकास करें। हमें ऐसा तंत्र बनाना चाहिए कि देश में सभी तरह की साम्प्रदायिक हिंसा पर रोक लग सके। बीजद के तथागत सथपति ने कहा कि पिछली लोकसभाओं में अल्पसंख्यकों की पैरोकारी करने वालों ने वास्तव में उनका कितना ख्याल रखा है, यह इस लोकसभा को देखकर स्पष्ट हो जाता है। उन्होंने कहा कि ईश्वर सबके हैं, किसी के निजी अधिकार क्षेत्र में नहीं हैं। क्या जब पहले मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारों में लाउडस्पीकर नहीं लगाये गए थे तब क्या ईश्वर नहीं था? ऐसी स्थिति को रोकने के लिए साम्प्रदायिक सौहार्द प्राधिकार का गठन किया जाना चाहिए।

तेदेपा के एम श्रीनिवास राव ने कहा कि जनप्रतिनिधि के नाते देश में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाये रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। आज सबसे बड़ी चुनौती गरीबी है। देश में साम्प्रदायिक माहौल खराब होने के लिए वोट बैंक की राजनीति एक कारण है। उन्होंने कहा कि दुनिया में दो धर्म है-अमीर और गरीब। सम्प्रदायिक हिंसा से केवल गरीब प्रभावित होता है। माकपा के मोहम्मद सलीम ने कहा कि हमारा मकसद भावनाओं को भड़काना नहीं होना चाहिए बल्कि इसे रोकना होना चाहिए। लेकिन अधिकांश समय हम ऐसा करने में विफल रहे हैं। पिछले अनेक वर्षों में देश में साम्प्रदायिक हिंसा की घटनाएं देखने को मिली है और यह समय समय पर कम या अधिक रहा है।

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