हर घर की चहेती बहू (स्मृति ईरानी) बनी देश की मंत्री

राजनीति में आने और भाजपा का अकसर दिखाई देने वाला चेहरा बनने से पहले 38 वर्षीय स्मृति ईरानी एक लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक में ‘बहू’ का किरदार निभाकर लाखों परिवारों की चहेती बन चुकी थी, खास तौर से महिलाएं उनकी आदर्श और अच्छी बहू की छवि से खासी प्रभावित थीं। लेकिन अभिनय से राजनीति में आने के बाद भी स्मृति ईरानी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई।

नई दिल्ली : राजनीति में आने और भाजपा का अकसर दिखाई देने वाला चेहरा बनने से पहले 38 वर्षीय स्मृति ईरानी एक लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक में ‘बहू’ का किरदार निभाकर लाखों परिवारों की चहेती बन चुकी थी, खास तौर से महिलाएं उनकी आदर्श और अच्छी बहू की छवि से खासी प्रभावित थीं। लेकिन अभिनय से राजनीति में आने के बाद भी स्मृति ईरानी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई।
ईरानी ने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर 2014 के लोकसभा चुनाव के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र से अपना चुनावी भाग्य आजमाया। उन्होंने कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाले उत्तर प्रदेश के अमेठी क्षेत्र से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। वह चुनाव भले ही हार गईं, लेकिन अपनी संघर्ष क्षमता का लोहा मनवाने में कामयाब रहीं।
गुजरात से राज्यसभा की सदस्य ईरानी कड़े चुनावी समर के लिए नयी नहीं हैं। 2004 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने चांदनी चौक से कपिल सिब्बल के खिलाफ चुनावी बिगुल फूंका और हार गई थीं।
आज ईरानी को भले ही मोदी का भरोसेमंद माना जाता है, लेकिन एक दशक पहले ऐसा कहा जाता है कि गुजरात में 2002 के दंगों के सिलसिले में वह मोदी का इस्तीफा तक मांग बैठी थीं, लेकिन बाद में उन्होंने अपना वह बयान वापस ले लिया था।
भाजपा के महिला मोर्चा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ईरानी इस समय पार्टी के उपाध्यक्ष के अहम ओहदे पर हैं। वह व्यवसायी जुबिन ईरानी की पत्नी हैं और उनकी एक पुत्री तथा एक पुत्र है।
ईरानी का जन्म दिल्ली में हुआ और उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में ही शिक्षा ग्रहण की। बाद में वह मुंबई चली गईं और अपने कुशल अभिनय से हर घर की दुलारी बन गईं। उन्होंने टेलीविजन धारावाहिक ‘क्यूंकि सास भी कभी बहू थी’ में बहू ‘तुलसी’ का केन्द्रीय किरदार निभाया और देखते देखते लोकप्रियता की सीढ़ियां चढ़ती चली गईं। ईरानी को खाली वक्त में किताबें पढ़ने का शौक है।
(एजेंसी)