भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला को शांति का नोबेल पुरस्कार

बचपन बचाओ आंदोलन के प्रणेता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को 2014 का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। विदिशा निवासी कैलाश सत्यार्थी नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले दूसरे भारतीय हैं।

भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला को शांति का नोबेल पुरस्कार

ज़ी मीडिया ब्यूरो

ओस्लो : भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को शुक्रवार को 2014 के लिए संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कार देने की घोषणा की गई। दोनों को यह पुरस्कार उप महाद्वीप में बाल अधिकारों को प्रोत्साहित करने के उनके कार्य के लिए प्रदान किया जाएगा।

मध्य प्रदेश के विदिशा निवासी कैलाश सत्यार्थी नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले दूसरे भारतीय हैं। इससे पहले मदर टेरेसा को इस पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। पुरस्कार की घोषणा के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि वह नोबेल शांति अवॉर्ड मिलने से बहुत खुश हैं। यह पुरस्कार बच्चों के अधिकारों के लिए हमारे संघर्ष का सम्मान है।

नार्वे की नोबेल कमेटी के मुताबिक इस साल सबसे अधिक (278) प्रतिभागियों ने इस पुरस्कार के लिए नामांकन भरा था। साल 2013 में 259 प्रतिभागियों ने नामांकन किया था। 278 प्रतिभागियों की सूची में से कैलाश सत्यार्थी और मलाला युसूफजई को विजेता घोषित किया गया। 

60 वर्षीय सत्यार्थी भारत में बचपन बचाओ आंदोलन नाम से एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) चलाते हैं और वह बच्चों को बंधुआ मजदूरी कराने और तस्करी से बचाने के अभियान में संलग्न हैं। वहीं 17 वर्षीय मलाला तब सुखिर्यों में आयीं जब तालिबानी आतंकवादियों ने लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने को लेकर उन्हें गोली मार दी थी। नोबेल शांति पुरस्कार समिति ने दोनों को इस वर्ष इस शीर्ष वैश्विक पुरस्कार के लिए चुना है।

पुरस्कार समिति के जूरी ने कहा, ‘नार्वे की नोबेल समिति ने निर्णय किया है कि 2014 के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को बच्चों और युवाओं के दमन के खिलाफ उनके संघर्ष तथा सभी बच्चों की शिक्षा के अधिकार के लिए उनके प्रयासों के लिए दिया जाए।

नोबेल समिति ने कहा कि एनजीओ ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ चलाने वाले सत्यार्थी ने महात्मा गांधी की परंपरा को बरकरार रखा और ‘वित्तीय लाभ के लिए होने वाले बच्चों के गंभीर शोषण के खिलाफ विभिन्न प्रकार के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का नेतृत्व किया है।’ समिति ने कहा कि वह ‘एक हिंदू और एक मुस्लिम, एक भारतीय और एक पाकिस्तानी के शिक्षा और आतंकवाद के खिलाफ साझा संघर्ष में शामिल होने को महत्वपूर्ण बिंदू मानते हैं।’

मलाला को शांति पुरस्कार श्रेणी में गत वर्ष भी नामांकित किया गया था। मलाला ने तालिबान के हमले के बाद भी तब जबर्दस्त साहस दिखाया था जब उन्होंने विशेष तौर पर पाकिस्तान जैसे देश में बाल अधिकारों और लड़कियों की शिक्षा के लिए अपना अभियान जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की थी।

मलाला सबसे कम आयु की नोबेल पुरस्कार विजेता बन गई हैं जबकि सत्यार्थी मदर टेरेसा के बाद शांति का नोबेल पुरस्कार जीतने वाले दूसरे भारतीय बन गए हैं। सत्यार्थी और मलाला प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय उन हस्तियों की विशिष्ट सूची में शामिल हो गए हैं जिन्होंने विश्व शांति और अन्य क्षेत्रों में अपने उल्लेखनीय कार्य के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार साझा किया।

मलाला ने गत वर्ष संयुक्त राष्ट्र में संबोधन दिया था और अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात की थी। टाइम पत्रिका ने मलाला को 100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में एक नामित किया था। गत वर्ष मलाला ने अपना संस्मरण ‘आई एम मलाला’ लिखा। समिति ने एक बयान में कहा, ‘युवावस्था में ही मलाला यूसुफजई ने लड़कियों की शिक्षा के अधिकार लिए संघर्ष किया तथा मिसाल पेश की कि बच्चे और युवा लोग अपनी स्थिति में सुधार करने के लिए योगदान दे सकते हैं।

समिति ने कहा, ‘उन्होंने यह सबसे खतरनाक स्थितियों में किया। वह अपने वीरतापूर्ण संघर्ष से लड़कियों की शिक्षा के अधिकार की प्रमुख पैरोकार बन गई हैं।’ इस वर्ष रिकार्ड 278 नामांकित होने वाले लोगों में पोप फ्रांसिस और कांगो के स्त्रीरोग विशेषज्ञ डेनिस मुकवेगी भी शामिल थे। यद्यपि इस पूरी सूची को गुप्त रखा गया था।

1993 में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद शासन के आखिरी राष्ट्रपति एफ डब्ल्यू डी क्लार्क और नेल्सन मंडेला को रंभभेद समाप्ति के लिए किये उनके काम के लिए यह पुरस्कार दिया गया था। अगले वर्ष इस्राइली नेता शिमोन पेरेज और यासिर अराफात को पश्चिम एशिया में तनाव कम करने के लिए किये गए उनके प्रयासों के लिए इस पुरस्कार से नवाजा गया। 1997 में जॉन ह्यूम (उत्तरी आयरलैंड) और डेविड ट्रिम्बले (ब्रिटेन) ने उत्तरी आयरलैंड में संघर्ष का शांतिपूर्व हल खोजने के उनके प्रयासों के लिए शांति का नोबेल पुरस्कार जीता। (एजेंसी इनपुट के साथ)