नारायण साईं गिरफ्तार, ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात पुलिस के हवाले

पुलिस ने 58 दिनों से लुकाछिपी का खेल खेल रहे विवादास्पद धार्मिक गुरु आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं को मंगलवार की रात हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गिरफ्तार कर लिया।

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो
नई दिल्ली/चंडीगढ़ : पुलिस ने 58 दिनों से लुकाछिपी का खेल खेल रहे विवादास्पद धार्मिक गुरु आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं को मंगलवार की रात हरियाणा के कुरुक्षेत्र में गिरफ्तार कर लिया।
वहीं, दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को नारायण साईं को एक दिन के लिए ट्रांजिट रिमांड पर गुजरात पुलिस को सौंप दिया। पिता आसाराम बापू के एक नाबालिग लड़की की यौन प्रताड़ना मामले में फंसने के बाद नारायण पर भी सूरत में दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ और इसके बाद से वह गिरफ्तारी से बचने के लिए चोला बदलकर घूम रहा था। उसे मंगलवार रात हरियाणा के कुरुक्षेत्र के समीप पीपली गांव से चार सहयोगियों के साथ गिरफ्तार किया गया।
महानगर दंडाधिकारी धीरज मोर ने नारायण साईं और दो अन्य आरोपी कौशल ठाकुर उर्फ हनुमान और कार चालक रमेश मल्होत्रा के लिए ट्रांजिट रिमांड मंजूर कर लिया। सूरत की एक अदालत ने नारायण साईं के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है।
गुजरात पुलिस ने यह कहते हुए ट्रांजिट रिमांड की मांग की कि नारायण साईं को सूरत की अदालत में पेश करना है। अदालत ने उचित दस्तावेज और फाइल पेश नहीं करने के लिए गुजरात पुलिस की खिंचाई की और दस्तावेज की स्कैन प्रति जमा कराने के लिए कहा। अदालत ने उल्लेख किया कि गुजरात पुलिस समय पर संगत दस्तावेज नहीं करा सकी।
30 वर्षीया महिला द्वारा दायर कराई गई शिकायत के बाद से नारायण फरार था। महिला ने आरोप लगाया है कि स्वयं को भगवान कृष्ण का अवतार बताने वाले नारायण ने 2001 और 2005 के बीच उसके साथ दुष्कर्म किया था। हरियाणा के एक गांव से गिरफ्तार किए गए नारायण साईं को दबोचने के लिए दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की चार टीमें लगाई गई थीं। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (अपराध शाखा) रविंद्र यादव ने बताया कि हमें नारायण साई के वाहन चालक रमेश के पंजाब के लुधियाना में होने की सूचना मिली। हमने अंदाजा लगाया कि साईं भी वहां हो सकता है, और हमने चार टीमें गठित कीं।
नारायण को छापा मारकर पकड़ने वाली टीम के एक अधिकारी ने बताया कि 30 पुलिसकर्मियों को चार टीमों में बांटा गया। चारों टीमें नौ पुलिस वाहनों में सवार होकर साईं को गिरफ्तार करने के लिए लुधियाना के वभिन्न स्थानों पर छापा मारने के लिए निकलीं। पुलिस उपायुक्त (अपराध शाखा) कुमार ज्ञानेश ने आईएएनएस को बताया कि पहली टीम रविवार को करीब अपराह्न दो बजे, दूसरी टीम मंगलवार को दोपहर बाद और तीसरी टीम मंगलवार को सायं छह बजे दिल्ली से रवाना हुई। अधिकारी ने बताया कि उन्हें प्रारंभिक सूचना मिली कि साई लुधियाना के किसी गौशाला में पिछले 10 दिनों से छिपा हुआ है, लेकिन पुलिस के वहां पहुंचने से आधा घंटा पहले ही वह वहां से चला गया।
अधिकारी ने आगे बताया कि लगभग 200 किलोमीटर पीछा करने के बाद हमने मंगलवार रात करीब 10.15 बजे साईं को उसके अनुयायी हनुमान, वाहन चालक रमेश और एक नाबालिग के साथ हरियाणा के पीपली गांव में एक पेट्रोल पंप के नजदीक गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय साईं ने अपनी पहचान छिपाने के लिए आम पंजाबी युवकों की भांति केसरिया रंग की पगड़ी बांध रखी थी और पैंट, टी शर्ट के साथ जैकेट पहन रखी थी। पुलिस ने बताया कि शिकायत में नारायण और हनुमान के नाम पहले से है। छानबीन के दौरान यह खुलासा था हुआ कि मल्होत्रा साईं को लड़कियां भेजा करता था। पुलिस ने कहा कि इस आपराधिक कृत्य में तीनों की समान रूप से संलिप्तता थी।
नारायण के वकील प्रदीप राणा ने अदालत से कहा कि उनका मुवक्किल एक अदालत में आत्मसमर्पण के लिए गुजरात जा रहा था लेकिन पुलिस ने एक गुप्त सूचना पर उसे गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने पुलिस की दलील का विरोध किया और कहा कि साईं जांच में सहयोग करेगा। राणा ने कहा कि इस मामले में साईं निर्दोष है। अदालत ने जब सवाल किया कि नारायण अदालत के समन की उपेक्षा क्यों कर रहा था, वकील ने कहा कि साईं यह समझ गया था कि इस मामले को मीडिया ने जिस कदर हवा दी है, उस बिनाह पर उसकी जमानत अर्जी मंजूर नहीं की जाएगी या कोई राहत मिलने वाली नहीं है। बचाव पक्ष के एक अन्य वकील ए.पी. सिंह ने कहा कि यह मामला राजनीति से प्रेरित है और हिंदू संतों की छवि मलिन करने की नीयत से मामला दर्ज कराया गया है।