रोजादार कैंटीन मैनेजर के मुंह में रोटी ठूंसने पर संसद में हंगामा, शिवसेना सांसद ने मांगी माफी

महाराष्ट्र सदन में शिवसेना के एक सांसद द्वारा वहां के एक रोजादार मुस्लिम कर्मचारी के मुंह में रमजान के दौरान रोटी ठूंसने की घटना पर चर्चा की मांग को लेकर बुधवार को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ, जिसके कारण दोनों सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

रोजादार कैंटीन मैनेजर के मुंह में रोटी ठूंसने पर संसद में हंगामा, शिवसेना सांसद ने मांगी माफी

ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

नई दिल्ली : महाराष्ट्र सदन में शिवसेना के एक सांसद द्वारा वहां के एक रोजादार मुस्लिम कर्मचारी के मुंह में रमजान के दौरान रोटी ठूंसने की घटना पर चर्चा की मांग को लेकर बुधवार को संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में जबरदस्त हंगामा हुआ। बुधवार को पूरे दिन टीवी चैनलों पर महाराष्ट्र सदन की घटना जिसमें एक सांसद द्वारा एक कर्मचारी के मुंह में रोटी ठूंसते दिखाया गया का वीडियो चलता रहा। रोठी ठूंसने वाले जनाब ठाणे से शिवसेना के सांसद राजन विचारे हैं और जिसके मुंह में रोटी ठूंसी जा रही है, वो अरशद ज़ुबैर महाराष्ट्र सदन में आईआरसीटीसी कैंटीन के रेसिडेंट मैनेजर हैं। अरशद का कहना है कि सांसद के ऐसा करने से उसका रोज़ा समय से पहले ही टूट गया।

महाराष्ट्र सदन में हुई इस शर्मनाक घटना के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। एक समय भाजपा के सांसद रमेश विधूड़ी और विपक्षी सांसदों में हाथापाई तक की नौबत आ गई, लेकिन दोनों पक्षों के वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव कर मामले को शांत कराया। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर लोकसभा से वाकआउट भी किया। हालांकि, बाद में, महाराष्‍ट्र सदन विवाद पर शिवसेना सांसद राजन विचारे ने माफी मांग ली। विचारे ने अपनी ओर से पेश सफाई में कहा कि मैनेजर की शर्ट पर नेम प्‍लेट नहीं लगी थी। हमें उसके धर्म के बारे में नहीं पता था। हम सांसदों के साथ हो रहे बर्ताव पर गुस्‍सा थे। हमें पता ही नहीं था कि वह शख्‍स मुस्लिम है। उन्‍होंने कहा कि हम सभी धर्मों का सम्‍मान करते हैं।

आज शून्यकाल शुरू होने पर अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस के एमआई शाहनवाज को यह विषय उठाने की अनुमति दी। शाहनवाज ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सदन में वहां के एक कर्मचारी को शिवसेना के कुछ सांसदों ने केवल इसलिए चपाती खाने पर मजबूर किया कि क्योंकि वह उन्हें महाराष्ट्रीयन खाना उपलब्ध नहीं करा पाया था। कांग्रेस सांसद ने कहा कि यह विषय इसलिए गंभीर है क्योंकि यह रमजान का पवित्र महीना है और संबंधित कर्मचारी जिसे जबरन चपाती खिलाई गई, उसका रोजा था।

उन्होंने कहा कि इस कर्मचारी की नेमप्लेट से भी यह साफ था कि वह मुस्लिम है। इसके बावजूद रमजान के महीने में उसके साथ यह व्यवहार किया गया। इस बीच संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने शाहनवाज द्वारा इस कर्मचारी का नाम लेने और इस विषय को उठाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन के बाहर के व्यक्ति का नाम नहीं लिया जा सकता है और साथ ही यह एक संवेदनशील मामला है और सचाई क्या है, यह मालूम नहीं, इसलिए मामला रिकार्ड में नहीं जाना चाहिए।

बहरहाल, अध्यक्ष ने शिवसेना के अनंत गीते को उनकी बात रखने का अवसर दिया। गीते ने कहा कि रमजान एक पवित्र महीना माना जाता है और सभी उसका सम्मान करते हैं और इसलिए इस पवित्र महीने में किसी को असत्य बात नहीं कहनी चाहिए। उन्होंने ऐसी कोई घटना होने से इंकार किया। इससे पहले, उन्होंने असत्य शब्द की जगह एक अन्य शब्द का प्रयोग किया था जिस पर विपक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई और अध्यक्ष ने उस शब्द को कार्यवाही से निकालने की व्यवस्था दी। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच गर्मागर्मी बढ़ती गई और एक समय भाजपा के रमेश विधूड़ी यह कहते हुए विपक्ष की ओर तेजी से बढ़े कि यह हिंदुस्तान है।

दूसरी ओर, राजद के पप्पू यादव और आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुसलमीन के असादुद्दीन औवेसी सहित विपक्ष के कई सदस्य विधूड़ी की ओर लपकते देखे गए। ये सदस्य एक दूसरे को सदन से बाहर निकल कर देख लेने की धमकी देते भी देखे गए। इसी बीच, सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ओर के वरिष्ठ सदस्यों ने बीच बचाव करके मामले को संभाला। अध्यक्ष ने व्यवस्था बिगड़ते देख सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।

सदन की बैठक दोबारा शुरू होने पर नायडू ने कहा कि यह बहुत संवेदनशील मामला है। यह घटना हुई है या नहीं, यह किसी को नहीं मालूम। लेकिन मैं अपने सदस्य (विधूड़ी) के आचरण को अस्वीकार करता हूं और वह अपने इस आचरण के लिए सदन से क्षमा मांगेंगे। इस बीच, सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि माफी मांगना ही काफी नहीं है बल्कि सदस्य के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और इस मामले को आचरण समिति को भेजा जाना चाहिए।

अध्यक्ष ने विधूड़ी से अपनी बात रखने को कहा जिस पर भाजपा के सदस्य ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय की भावना को आहत करना नहीं था लेकिन फिर भी सदन को अगर ऐसा लगता है तो वह इसके लिए माफी मांगते हैं। सदन की आज की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वाम, आप, राजद और राकांपा के सदस्य इस मुद्दे को एकजुटता के साथ उठाया। लेकिन अध्यक्ष ने उन्हें इसे शून्यकाल में उठाने को कहा। भाजपा सदस्य द्वारा खेद व्यक्त किये जाने के बाद स्पीकर ने शून्यकाल की कार्यवाही को आगे बढ़ाते हुए तृणमूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय को अपनी बात रखने को कहा और उन्होंने अपनी बात रखी। लेकिन कांग्रेस के सदस्य महाराष्ट्र सदन के मुद्दे को लेकर अपनी बात रखने का प्रयास करने लगे। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस, राकांपा , वामदल और राजद के सदस्यों ने सदन से वाकआउट किया।

संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि यह संवेदनशील मुद्दा है। कोई सचाई नही जानता है। हमें पता नहीं यह घटना हुई है या नहीं। सरकार इसमें कहीं से भी शामिल नहीं है। (एजेंसी इनपुट के साथ)