UPSC परीक्षा विवाद: सरकार से आश्वासन मिलने के बाद छात्रों ने आमरण अनशन तोड़ा

सिविल सेवा परीक्षा के प्रारूप को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपनी मांगों के समर्थन में सरकार से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद आज अपना आमरण अनशन तोड़ दिया।

नई दिल्ली : सिविल सेवा परीक्षा के प्रारूप को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपनी मांगों के समर्थन में सरकार से सकारात्मक आश्वासन मिलने के बाद आज अपना आमरण अनशन तोड़ दिया।

सरकार द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि सांसद मनोज तिवारी और अन्य नेताओं ने अनशन कर रहे छात्रों को फल का रस पिलाया जिसके बाद औपचारिक तौर पर अनशन खत्म कर दिया गया। छात्रों ने आभार जताया और अपनी मांगों पर ध्यान देने को लेकर केंद्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह का शुक्रिया अदा किया। सिविल सेवा के प्रदर्शनकारी उम्मीदवार यह मांग कर रहे थे कि ग्रामीण इलाकों के छात्रों के साथ समानता के लिए सिविल सर्विसेज एप्टीट्यूड परीक्षा (सीसैट) को बदला जाए।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वे लोग अपनी मांगों को लेकर विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांगों में सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2014 की तिथि को आगे बढ़ाया जाना भी शामिल है। यह परीक्षा 24 अगस्त को होनी है। इससे पहले दिन के वक्त सिंह ने लोकसभा में कहा कि सरकार इस मुद्दे से पूरी तरह से अवगत है और इस विषय पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर रही है। मंत्री ने कहा था कि हम छात्रों से खुद को अनावश्यक शारीरिक और मानसिक वेदना नहीं देने की अपील करते हैं क्योंकि सरकार उनके मुद्दे पर पहले से ही गौर कर रही है।

सरकार ने उनकी शिकायतों पर गौर करने के लिए और इसके सुझावों को आगे बढ़ाने के लिए तीन सदस्यीय एक समिति का गठन किया है। हम मामले के महत्व को देखते हुए समिति से प्रक्रिया को तेज करने और जल्द से जल्द रिपोर्ट तैयार करने के लिए लिख रहे हैं। उन्होंने कहा, हम माननीय सदस्यों और छात्रों को कहना चाहेंगे कि भाषा के आधार पर किसी तरह के पूर्वाग्रह की इजाजत नहीं होगी। हम इन युवाओं से अपना प्रदर्शन खत्म करने और अपने नियमित दिनचर्या पर लौटने की अपील करते हैं।