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मोदी पर बरसे पवार, अधिकारों के केंद्रीकरण के खिलाफ चेताया

राकांपा अध्यक्ष शरद पवार को लगता है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के हाथों में ‘अधिकारों का केंद्रीकरण’ होना भारतीय लोकतंत्र के लिए गलत संकेत है।

मुंबई : राकांपा अध्यक्ष शरद पवार को लगता है कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के हाथों में ‘अधिकारों का केंद्रीकरण’ होना भारतीय लोकतंत्र के लिए गलत संकेत है।
मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे पर भी पवार को गहरी आपत्ति होती है और उनके इस पूर्वानुमान पर भी कि लोकसभा चुनाव नेहरू गांधी परिवार का वंशवाद समाप्त करेंगे। एक साक्षात्कार में पवार ने कहा कि आडवाणी भाजपा के संस्थापक सदस्य और पूर्व अध्यक्ष हैं। वह भोपाल सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उन्हें इच्छा न होते हुए भी गांधीनगर वापस जाना पड़ा।
मुरली मनोहर जोशी भी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष हैं और वह अपनी पुरानी सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे। पर उन्हें भी सीट बदलनी पड़ी। वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह अच्छे वित्त मंत्री और सांसद रह चुके हैं। मोदी ने उन्हें दूर रखने का फैसला किया और उन्हें दूर जाना पड़ा। अब वह निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कहते हुए मुझे बहुत दुख हो रहा है कि मोदी पार्टी को अपने नियंत्रण में रखना चाहते हैं। बेशक, यह उनकी पार्टी है और मैं कुछ नहीं कह सकता लेकिन अधिकारों का केंद्रीकरण हमेशा ही गलत होता है और इसका असर आम आदमी पर पड़ता है।
पवार ने एक बार फिर मोदी की तुलना नाजी तानाशाह एडोल्फ हिटलर से की। उन्होंने कहा कि हमने हिटलर को देखा है। वह एक लोकतांत्रिक ढांचे से निर्वाचित हुए थे और सत्ता पूरी तरह अपने नियंत्रण में रखी। पूरी दुनिया ने देखा कि उन्होंने किस तरह यहूदियों को खत्म किया, दूसरों पर हमले किए और अधिकारों का दुरूपयोग किया। आज, आडवाणी, जोशी और सिंह का उदाहरण बताता है कि किस तरह मोदी के हाथों में अधिकारों का नियंत्रण हो रहा है। पहले कांग्रेस में रह चुके पवार ने कहा कि लोगों को मोदी का ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का विचार पसंद नहीं है और उन्हें लगता है कि यह भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार पर भारी पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि जब मोदी ने ‘कांग्रेस मुक्त मिशन’ शुरू किया तो हर कोई स्तब्ध रह गया। बुरा लगा। लोग कांग्रेस मुक्त भारत का विचार नहीं पसंद करते। हमारी अपनी सोच वह है जो हमने नेहरू, गांधी और गांधी के विचारों से सीखा। बाबासाहेब अंबेडकर ने हमें संविधान दिया जिसके तहत आम लोगों को व्यापक अधिकार मिले। मैं नहीं जानता कि क्यों मोदी ने यह नारा उठाया। यह पूछे जाने पर कि क्या यह मोदी और भाजपा पर पलटवार करेगा, पवार ने कहा कि मुझे तो ऐसा ही लगता है। जब मैं गांवों और शहरों में जाता हूं तो लोग यह मुद्दा उठाते हैं। मोदी की इस टिप्पणी को लेकर भी राकांपा के दिग्गज ने उन पर नाराजगी जाहिर की कि लोकसभा चुनाव नेहरू गांधी ‘वंश परंपरा’ का अंत होंगे।
उन्होंने कहा कि सवाल नेहरू गांधी वंश परंपरा का नहीं है। यह नेहरू गांधी की विचारधारा का सवाल है। यह खास तौर पर कांग्रेस की विचाराधारा, देश की एकता और देश की धर्मनिरपेक्षता का प्रतीकात्मक प्रतिनिधि है। (एजेंसी)