गेंदबाजों को अपने दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए: MS धोनी

भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज गंवाने के बाद अपने गेंदबाजों से कहा कि गेंदबाजी करते समय उन्हें अपने दिमाग का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए।

हैमिल्टन : भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे सीरीज गंवाने के बाद अपने गेंदबाजों से कहा कि गेंदबाजी करते समय उन्हें अपने दिमाग का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। धोनी ने चौथे वनडे मैच में हार के बाद गेंदबाजों को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘जब कौशल की बात आती है तो निश्चित तौर पर हमारे पास ऐसे गेंदबाज हैं जो अच्छा प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्हें अपने दिमाग का अधिक से अधिक इस्तेमाल करना चाहिए। उन्हें खुद में सुधार करना होगा।’
उन्होंने कहा, ‘इस सीरीज को छोड़ दिया जाए तो मोहम्मद शमी ने नियमित अच्छा प्रदर्शन किया है। भुवनेश्वर कुमार के लिये यह सीरीज अच्छी नहीं रही लेकिन वह अच्छा गेंदबाज है। जो भी उन्हें परिस्थितियों के हिसाब से गेंदबाजी करनी होगी क्योंकि नियमों में बदलाव के बाद स्थिति मुश्किल हो गयी है। इस सीरीज में हालांकि हमारी हार का कारण नियमों में बदलाव नहीं है। इसका कारण खराब गेंदबाजी है।’
धोनी ने कहा कि गेंदबाजों ने लगातार शॉर्ट और वाइड गेंद की जिससे काफी रन गये। उन्होंने कहा, ‘सच कहूं तो मैं अपने गेंदबाजों से बहुत निराश हूं। ये इस तरह के विकेट है जहां आप शॉर्ट और वाइड गेंद नहीं करना चाहते। मुझे लगता है कि हमने नयी और पुरानी गेंद से लगातार ऐसा किया।’ उन्होंने कहा, ‘हम अक्सर सर्किल के बाहर पांच क्षेत्ररक्षकों की शिकायत करते रहे हैं लेकिन जब आप शॉर्ट और वाइड गेंद करोगे तो इससे कोई असर नहीं पड़ता। मैं समझता हूं कि तेज गेंदबाजों ने काफी रन दिये। जहां तक स्पिनरों की बात है तो उन्होंने अच्छी गेंदबाजी की और सही जगह पर गेंद पिच करायी।’धोनी ने अपने बल्लेबाजों को भी नहीं बख्शा और कहा कि उन्होंने महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट गंवाने की पुरानी गलतियों को फिर से दोहराया।
धोनी ने चौथे मैच में भारत की सात विकेट से हार के बाद कहा, ‘हमने बल्लेबाजी में फिर से वही गलतियां दोहरायी। हमनें महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट गंवाये जैसा कि अब तक इस सीरीज में होता रहा है। इसके बावजूद हम 280 रन के करीब पहुंच गये थे। यदि हम अच्छी गेंदबाजी करते तो यह अच्छा स्कोर था लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।’ भारतीय कप्तान ने कहा, ‘शीर्ष पर हमें संघर्ष करना पड़ा। पिछले मैच में हमने कुछ अच्छी शुरूआत की थी लेकिन इस मैच में हमें सिर्फ संघर्ष करना पड़ा। दस ओवर तक हम कुछ विकेट गंवा देते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘हमें अच्छी साझेदारियां करनी होंगी, हमने पारी के अंत में अच्छी साझेदारी की लेकिन हमने गलत समय पर विकेट गंवाए जिसका मतलब हुआ कि इसने हमने मध्यक्रम पर दबाव बना दिया और इससे आपको हताशा होती हैं क्योंकि आप प्रतिस्पर्धी स्कोर से 15 से 20 अतिरिक्त रन कम बनाते हो।’ धोनी से पूछा गया कि जब अपने शुरूआती स्पैल में रविंद्र जडेजा और आर अश्विन ने अच्छी गेंदबाजी की थी तो उन्हें आक्रमण से क्यों हटाया गया, उन्होंने कहा, ‘हमारे तेज गेंदबाजों ने शुरूआती दस ओवरों में जिस तरह की गेंदबाजी की उससे मुझे विश्वास नहीं था कि वह बाद में दबाव बना पाएंगे। इसलिए मेरा निजी विचार था कि स्पिनरों विशेषकर जडेजा का उपयोग बाद में करना चाहिए जबकि बल्लेबाज बड़े शाट खेलने की कोशिश करेंगे।’
भारत ने शिखर धवन और सुरेश रैना को बाहर बिठाया। विराट कोहली से पारी का आगाज करवाया और अंजिक्य रहाणे तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी के लिये आये। अंबाती रायुडु ने 2013 के जिम्बाब्वे दौरे के बाद अपना पहला वनडे मैच खेला जबकि स्टुअर्ट बिन्नी को पदार्पण का मौका मिला। धोनी ने इस बारे में कहा, ‘हमें कभी न कभी ये बदलाव करने थे। रैना अच्छी शुरूआत को बड़े स्कोर में तब्दील नहीं कर पा रहा था। यदि आप कभी किसी खिलाड़ी को कुछ मैचों से बाहर करते हो तो वह अपने खेल के बारे में सहज होकर सोच सकता है। इसलिए हमने शिखर और सुरेश रैना दोनों को इस मैच से बाहर किया।’
उन्होंने कहा, ‘हमने विराट से बात की और वह पारी की शुरूआत करने को लेकर आश्वस्त था। इससे हमें रहाणे को नंबर तीन और रायुडु को नंबर चार पर उतारने का मौका मिला। रहाणे सलामी बल्लेबाज के तौर पर आया था। हमने कुछ महीने पहले चयनकर्ताओं के साथ मध्यक्रम में अच्छे बल्लेबाज रखने पर फैसला किया था। हम पहले उसे सलामी बल्लेबाज के रूप में अपना चुके हैं और यह नहीं चल पाया। इसलिए हम उसे मध्यक्रम में आजमा रहे हैं।’ (एजेंसी)