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डीयू के बीटेक के छात्रों ने यूजीसी कार्यालय के बाहर किया प्रदर्शन

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की ओर से विवादास्पद चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (एफवाईयूपी) खत्म किए जाने पर विश्वविद्यालय के बीटेक के विद्यार्थियों ने शुक्रवार को यहां यह मांग करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया कि उनका चार वर्षीय पाठ्यक्रम तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के रूप में नहीं बदला जाना चाहिए।

नई दिल्ली : दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की ओर से विवादास्पद चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम (एफवाईयूपी) खत्म किए जाने पर विश्वविद्यालय के बीटेक के विद्यार्थियों ने शुक्रवार को यहां यह मांग करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया कि उनका चार वर्षीय पाठ्यक्रम तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के रूप में नहीं बदला जाना चाहिए।

यूजीसी के दबाव में डीयू एफवाईयूपी खत्म कर पिछले तीन वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पर लौट आया है जिससे बीटेक के विद्यार्थियों की किस्मत पर अस्पष्टता छा गई है। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने मांग की कि उनका पाठ्यक्रम विज्ञान स्नातक में बदला नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जबतक इस संबंध में आयोग से लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, वे प्रदर्शन करते रहेंगे।

कंप्यूटर साइंस में बीटेक के छात्र अर्जुन मल्होत्रा ने कहा कि यदि बीटेक डिग्री को बीएससी में बदल दिया गया तो यह अन्याय होगा क्योंकि हमने तो बीटेक डिग्री के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया था और हमें यह डिग्री पाने की आस है। दिल्ली विश्वविद्यालय ने पिछले साल एफवाईयूपी के तहत अपने पाठ्यक्रम में छह बीटेक कोर्स शुरू किया था।

आज ही दिन में जब चार वर्षीय बी टेक पाठ्यक्रमों के छात्रों की किस्मत के बारे में पूछा गया था तब विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति सुधीश पचौरी ने कहा था कि फिलहाल, कुलपति का बयान हमारे लिए इबारत है। हम उससे कम या ज्यादा नहीं जानते। आज दोपहर डीयू के कुलपति दिनेश सिंह ने विश्वविद्यालय से संबद्ध कालेजों के प्राचार्यों से 2012-13 के दौरान विद्यमान पाठ्यक्रमों के तहत दाखिला शुरू करने को कहा। डीयू के बीटेक के अन्य छात्र अंशु गोयल ने कहा कि हमने वरिष्ठ यूजीसी अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा था और उनसे हमारे हितों को ध्यान में रखने की अपील की थी। लेकिन उन्होंने हमारी मांगों को नजरअंदाज किया। उसने कहा कि यदि बीएससी के रूप में तब्दील किया गया तो इस डिग्री का कोई बाजार मूल्य रह ही नहीं जाएगा।