भाजपा किरण बेदी को बनाएगी दिल्ली की मुख्यमंत्री उम्मीदवार? हर्षवर्धन ने कहा- `नहीं`

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फिर से सरकार बनाने की नकाम कोशिश के बाद भाजपा की सरकार बनने की चर्चा होने लगी थी और किरण बेदी को दिल्ली की मुख्यमंत्री बनाए जाने की खबर थी। लेकिन इस खबर को खारिज करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एक न्यूज चैनल से कहा कि किरण बेदी को दिल्ली में भाजपा के सीएम पद का उम्मीदवार बनाने की बात बेबुनियाद है।

ज़ी मीडिया ब्यूरो
नई दिल्ली: केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद दिल्ली में सरकार गठन को लेकर गाहे बगाहे चर्चा होती रहती है। आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फिर से सरकार बनाने की नकाम कोशिश के बाद भाजपा की सरकार बनने की चर्चा होने लगी थी और किरण बेदी को दिल्ली की मुख्यमंत्री बनाए जाने की खबर थी। लेकिन इस खबर को खारिज करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने एक न्यूज चैनल से कहा कि किरण बेदी को दिल्ली में भाजपा के सीएम पद का उम्मीदवार बनाने की बात बेबुनियाद है।
हर्षवर्धन ने कहा, अभी तक पार्टी में इस बात क लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। ये सब बातें सिर्फ माडिया में होती हैं। मीडिया नॉन इश्यू को लोगों में इश्यू बना रही है। वहीं दूसरी तरफ हर्षवर्धन ने कहा कि वे भी दिल्ली का सीएम बनने का सपना नहीं देख रहे है क्योंकि उनका पूरा ध्यान स्वास्थ्य मंत्रालय पर है।
गौरतलब है कि देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी और सामजिक कार्यकर्ता किरण बेदी ने कुछ दिनों पहले सक्रिय राजनीति में आने के संकेत देते हुए कहा था कि अगर उन्हें दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो वह इस जिम्मेदारी को लेने से इनकार नहीं करेंगी।
बताया जाता है कि भाजपा की दिल्ली इकाई में यह खबर फैलने के बाद असंतोष के स्वर उभरने लगे थे कि पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाया जा सकता है। इस पर पार्टी के कई नेताओं ने कथित रूप से `असहयोग` और `हराने` की धमकी दी थी। पार्टी सूत्रों ने कहा था, पार्टी में किरण बेदी के नाम पर गंभीर विरोध है। पार्टी के अधिकांश नेता और कार्यकर्ताओं को उन्हें मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाया जाना पसंद नहीं है।
जन लोकपाल आंदोलन के दौरान किरण बेदी और आम आदमी पार्टी (आप) के संस्थापक अरविंद केजरीवाल अन्ना हजारे के सहयोगी रह चुके हैं। उस दौरान किरण कई मौकों पर कांग्रेस और भाजपा दोनों को कोस चुकी हैं। बाद में उनका मन बदला और भाजपा उन्हें अच्छी लगने लगी।